सीएम ने कहा कि अब सुनिश्चित किया जाएगा कि जनमंच में केवल जनसमस्याएं ही ली जाएं। मांगों को प्राथमिकता नहीं मिलेगी। कार्यक्रम में पहुंचीं मांगों को अलग रखा जाएगा, जिस पर बाद में विचार किया जा सकता है। सीएम ने कहा कि जनमंच में शामिल होने वाली जिन समस्याओं का मौके पर निपटारा नहीं होता, उन्हें जिला उपायुक्त को भेजा जाएगा। उपायुक्त के पास भी हल नहीं निकला तो उसे मुख्यमंत्री कार्यालय देखेगा।
सीएम ने कहा कि बहुत से लोग काम करवाने के लिए सीएम कार्यालय या व्यक्तिगत रूप से उनके पास पहुंचते हैं। काम नहीं होने पर वे छींटाकशी करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि वह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जो काम जायज और होने वाला होगा, वह एक ही दिन में हो जाएगा। जो काम नहीं होने वाला होगा, वह कभी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वह पूरे प्रदेश के सीएम हैं।
सीएम ने कहा कि पड़ोसी प्रदेशों में हिमाचल के जनमंच का डंका बज रहा है। कई प्रदेश हिमाचल में आयोजित होने वाली जनमंच की प्रणाली को जानने की इच्छा जाहिर कर रहे हैं। जनमंच कार्यक्रम प्रशासन जनता के द्वार कार्यक्रम से एकदम अलग है।