वित्त विभाग की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री ने सोमवार को पीडब्ल्यूडी विभाग के कामकाज का आकलन किया। उन्होंने नए राजमार्गों के निर्माण में देरी पर चिंता जताई। केंद्र से स्वीकृत 62 एनएच की निर्माण प्रक्रिया शुरू करने के लिए समयसीमा तय की है।
प्रदेश में मौजूदा समय में 69 राष्ट्रीय राजमार्ग हैं। इनमें 44 सौ किलोमीटर रोड आता है। कहा कि निर्माण कार्यों का निरीक्षण सबसे अहम है। इस पर विभाग का उतना फोकस नहीं है। चीफ इंजीनियर स्तर के अधिकारी मौके पर निरीक्षण करें।
हर वित्तीय वर्ष में निर्मित होने वाली सड़कों और पुलों की रूपरेखा तय होनी चाहिए। मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने विभागीय अधिकारियों से साफ किया कि अप्रैल तक धरातल पर काम होता दिखना चाहिए। उन्होंने पुलों के निर्माण को प्राथमिकता बताया।
लोक निर्माण विभाग ने 16 सड़क और 26 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव केंद्र को भेजा है। दुर्घटना के लिहाज से संवेदनशील 17 ब्लैक स्पॉट ठीक करने के लिए संयुक्त 487 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है।
विभाग फिलहाल 170 डीपीआर पर काम कर रहा है। इनके लिए नाबार्ड ने 634 करोड़ दिए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में केंद्र को 384 करोड़ की डीपीआर भेजी है।
परवाणू - शिमला मार्ग निर्माण पर चिंता
मुख्य सचिव चौधरी ने परवाणू-शिमला राष्ट्रीय मार्ग के निर्माण कार्य पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मार्ग पर कोई साइन बोर्ड नहीं है, जिससे पता लगे कि सड़क मार्ग खराब है। उन्होंने ठेकेदार का नाम, बजट आदि दर्शाते साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने विभाग के लिए लक्ष्य तय किया है कि हर पंचायत मुख्यालय तक सड़क पहुंचनी चाहिए। इसके बाद हर गांव को जोड़ने की मुहिम चलेगी। जिन गांवों तक अभी सड़क नहीं पहुंची, उनके लिए अलग से प्लानिंग की जाएगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल खाची ने बताया कि विभाग ने हर गांव को सड़क से जोड़ने की रूपरेखा बनाना शुरू कर दी है। हर गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सड़कों के प्रस्तावों पर लगातार काम चल रहा है।