विधानसभा में शुक्रवार को बजट सत्र के पहले दिन हुए जबरदस्त हंगामे और राज्यपाल की सुरक्षा में चूक के बाद सोमवार को दूसरे दिन सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद रही। परिसर के अंदर चप्पे चप्पे पर मार्शल तैनात रहे। परिसर के मुख्य गेट और आसपास के अहम क्षेत्रों में भी 200 से ज्यादा पुलिस कर्मी तैनात रहे। परिसर के अंदर दाखिल होने के बाद कौंसिल चैंबर में भी जाने से पहले लोगों की पड़ताल की गई। परिसर में दाखिल होने वाले वाहनों की भी चेकिंग की गई।
शुक्रवार के विवाद के चलते विधानसभा अध्यक्ष व मुख्यमंत्री के आने जाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले गेट से किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। पहले इन गेटों से विधायकों व वीआईपी को आने दिया जाता था, लेकिन विवाद की वजह से किसी को भी अनुमति नहीं दी गई। कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की संभावना को देखते हुए सीआईडी पूरे समय शहर भर में होने वाली हर छोटी बड़ी सूचना को आला अधिकारियों से साझा करते रहे। सोमवार को डीजीपी संजय कुंडू खुद भी परिसर की सुरक्षा को लेकर लगातार अधिकारियों के साथ संवाद करते दिखे।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि सदन में शोकोद्गार के वीडियो पेन ड्राइव में परिवारों को भेजे जाएंगे। अभी तक सदन से शोकोद्गार के बाद विधानसभा से टाइप किए गए पत्र भेजे जाते रहे हैं। परमार ने सदन में शोकोद्गार में हिस्सा लेते हुए कहा कि सदस्यों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। चंद्रसेन ठाकुर, रघुराज, तुलसीराम शर्मा और सदस्य सुजान सिंह पठानिया को सदन में सुनने का मौका मिला है। अन्य सदस्यों को सदन में सुनने का मौका भले ही नहीं मिला, लेकिन उनके व्यक्तित्व से भलीभांति परिचित रहा हूं।
इन सदस्यों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
कहा कि इस बार से सदन में शोकोद्गार की वीडियो की पेन ड्राइव संबंधित परिवारों को भेजी जाएगी, जिससे सदस्यों के परिवारों को भी पता चले कि सदन में शोकोद्गार के समय सदस्यों ने क्या विचार रखे। पूरी कार्यवाही का वीडियो पेन ड्राइव में रिकॉर्ड कर भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ओर से रखे शोकोद्गार प्रस्ताव पर आशा कुमारी, सुखविंद्र सुक्खू, शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर, मंत्री राजीव सैजल, विधायक ठाकुर रामलाल, रमेश धवाला, राकेश सिंघा, आशीष बुटेल, जिया लाल, लखविंद्र राणा, विक्रमादित्य ने भी विचार रखे।