सीएम जयराम ठाकुर ने दिल्ली में पत्रकार वार्ता की।
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा है कि सिरमौर में हाटी समुदाय के लोगों को जनजातीय दर्जा दिलाने का रास्ता साफ हो गया है। इस विषय को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार के समक्ष रखा गया था। उन्होंने कहा है कि तमाम जानकारियों को प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र सरकार को भेजा गया है। वित्त वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ढाई लाख जनसंख्या है। आज यह संख्या तीन लाख हो चुकी है। विधानसभा क्षेत्र शिलाई, पच्छाद, पांवटा और रेणुकाजी हैं। सीएम जयराम ठाकुर ने दिल्ली में पत्रकार वार्ता में कहा कि 2009 में भाजपा ने हाटी को जनजातीय दर्जा मिलने की बात कही थी। इसे घोषणा पत्र में शामिल किया। इसे केंद्र सरकार के समक्ष रखा। जब राजनाथ सिंह गृह मंत्री थे तो भी इस मामले को उनके समक्ष रखा गया है। उत्तराखंड के दूसरी ओर के क्षेत्र के लोगों को जनजातीय दर्जा है। दूसरी ओर हिमाचल के लोगों को नहीं है। एक भाई जो हिमाचल में नहीं है, उसे जनजातीय दर्जा नहीं है, उधर उत्तराखंड में है। 1967 में यह दर्जा मिल गया था। लगातार इस बात को कहा जाता रहा। इसे आगे बढ़ाने के लिए जो प्रयत्न किया, उसमें सफलता मिली है।
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि आरजीआई ने भी हाटी समुदाय का शब्द शामिल कर लिया है। सारी बातें पेश की हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से इसमें चार मई 2004 को मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा गया। 15 जून 2006 को आरजीआई ने कहा था कि नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि 27 अगस्त 2011 को प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के जनजातीय विकास विभाग को अध्ययन करने को कहा। 30 जुलाई 2016 को संस्थान ये रिपोर्ट सौंपी। 3 अगस्त 2016 को यह नए प्रस्ताव के साथ भेजी गई। आरजेआई ने 16 मार्च 2017 को समर्थन नहीं किया। उसके बाद फिर रिपोर्ट मांगी। चार अगस्त 2018 को सारे विषय पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने निवेदन किया। 29 जून 2019 को भी इसे भेजा। दो मार्च 2021 को कहा कि ट्रांसगिरि क्षेत्र में 2011 की जनगणना के अनुसार आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा है कि सारी चीजें तथ्यों के आधार पर दी जाए। आने वाले समय में कैबिनेट में भी निर्णय होगा। तीन लाख लोगों को इसका लाभ होगा।