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कसौली गोलीकांड : निलंबित पूर्व एसपी मोहित चावला को क्लीन चिट

Wed, 29 Aug 2018 10:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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कसौली गोलीकांड के दौरान दायित्वों का निर्वहन न करने के आरोप के चलते निलंबित पूर्व एसपी सोलन मोहित चावला को सरकार ने क्लीन चिट दे दी है। आरोपों के संबंध में दिए मेमो के जवाब में चावला की दलीलों से संतुष्ट होने के बाद गृह विभाग ने उन्हें क्लीन चिट दे दी।

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अब सोमवार से चावला राज्यपाल के एडीसी के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाल लेंगे। कसौली में 1 मई को अवैध निर्माण तोड़ने की कार्रवाई के दौरान एक होटल मालिक विजय कुमार ने महिला टीसीपी अधिकारी शैलबाला शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के बाद प्रदेश की जयराम सरकार ने सोलन जिले के तत्कालीन एसपी मोहित चावला समेत 14 सरकारी कर्मचारियों को 25 मई को निलंबित कर दिया था। 

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यहां जानिए क्या है पूरा मामला

दरअसल, 1 मई को जब शैलबाला की हत्या हुई तो सरकार ने एक्शन दिखाने के लिए मोहित को निलंबित कर दिया। मेमो जारी कर जवाब तलब किया गया। चावला ने जवाब में बताया कि वह आधिकारिक रूप से 25 से 28 अप्रैल तक छुट्टी पर थे।

ऐसे में मीटिंग में शामिल होने का सवाल नहीं उठता। इसके अलावा डीसी सोलन ने 28 अप्रैल को अतिक्रमण तोड़ने के लिए पुलिस प्रशासन व टीसीपी अधिकारियों की जो बैठक की, उसमें छुट्टी पर चल रहे मोहित चावला को बुलाया ही नहीं।

डीएसपी स्तर के अधिकारी के साथ बैठक करने के बाद एसडीएम स्तर के अधिकारी को पूरे अभियान का प्रभारी बना दिया। छुट्टी से लौटने पर एसपी मोहित ने डीएसपी के साथ बैठक कर करीब 50 पुलिस कर्मियों को अभियान में तैनात कर दिया।

 
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टीसीपी अधिकारियों पर नहीं हुई कार्रवाई

ऐसे में उनकी गलती नहीं बनती। विभाग ने जवाब से संतुष्ट होने के बाद अब बिना उन्हें चार्जशीट दिए आरोपों से मुक्त कर क्लीन चिट दे दी है। एसडीएम और
खास बात यह है कि मामले में जिला प्रशासन की ओर से सिर्फ एक तहसीलदार को निलंबित किया गया, जबकि पुलिस के जिला एसपी को निलंबित कर दिया था।

इसी वजह से यह सवाल उठने शुरू हो गए थे कि जब अभियान व सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी एसडीएम को दी गई है तो उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसके अलावा हालात पैदा होने देने वाले टीसीपी अधिकारियों कर्मचारियों पर भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन्हीं सवालों के चलते पूरी आईपीएस लॉबी सरकार से खफा चल रही थी।
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