अधिसूचना को कई कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी
इस अधिसूचना को कई कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 112 याचिकाओं का संयुक्त निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने अधिसूचना को समानता के सिद्धांत के विरुद्ध बताते हुए रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एक समान वर्ग हैं, इसलिए उनके बीच सेवानिवृत्ति आयु को लेकर भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने आदेश दिया था कि जिन कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किया गया, उनकी सेवाएं बहाल कर उन्हें 60 वर्ष की आयु तक कार्य करने का अवसर दिया जाए। वहीं, जो कर्मचारी पहले ही 60 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, उन्हें 58 से 60 वर्ष की अवधि के वित्तीय लाभ भी दिए जाएं। उधर, महाधिवक्ता अनूप रतन ने बताया कि इस तरह के करीब 250 मामले लंबित हैं। अदालत ने एक मामले में एसएलपी को खारिज किया है। शेष मामले मेरिट के आधार पर ही सुने जाएंगे।