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शिमला में केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ गरजा सीटू, मुख्यमंत्री को सौंपा मांग पत्र

Wed, 17 Mar 2021 10:15 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
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राजधानी शिमला में वामपंथी जमकर गरजे। - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र और हिमाचल प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ बुधवार को राजधानी शिमला में वामपंथी जमकर गरजे। मजदूर संगठन सीटू के बैनर तले विभिन्न यूनियनों ने विधानसभा के समीप चौड़ा मैदान में प्रदर्शन किया। इस दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा परिसर में जाकर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और मंत्री बिक्रम सिंह को बारह सूत्रीय मांग पत्र भी सौंपा। प्रदेश भर से राजधानी शिमला में जुटी प्रदर्शनकारियों की भारी संख्या से शहर में सुबह से दोपहर तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। लोगों को पैदल ही अपने गंतव्यों तक जाना पड़ा।

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माकपा विधायक राकेश सिंघा ने केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला।

उन्होंने चेताया कि अगर मजदूर और किसान विरोधी कानून वापस नहीं लिए तो आंदोलन तेज होगा। सीटू के राष्ट्रीय सचिव कश्मीर ठाकुर ने प्रदेश सरकार पर मजदूर विरोधी होने का आरोप लगाया। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा और महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार के हालिया बजट को मजदूर, कर्मचारी और मध्यम वर्ग विरोधी बजट करार दिया। उन्होंने कहा है कि मजदूरों के दैनिक वेतन में केवल 25 रुपये, कोरोना योद्धा के रूप में कार्य कर चुकीं आंगनबाड़ी कर्मियों के वेतन में केवल 500 और 300 रुपये, आशा कर्मियों के वेतन में केवल 750 रुपये, मिड डे मील कर्मियों के वेतन में 300 रुपये, चौकीदारों के वेतन में 300 रुपये, एसएमसी और आउटसोर्स आईटी शिक्षकों के वेतन में केवल 500 रुपये, वाटर गार्ड के वेतन में 300 रुपये और सिलाई अध्यापिकाओं के वेतन में केवल 500 रुपये की बढ़ोतरी मजदूरों और कर्मचारियों के साथ मजाक है। 
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यह हैं मांगें
श्रम कानूनों को खत्म कर बनाए गए मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं को समाप्त किया जाए।
न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये दिया जाए।
वेतन को उपभोक्ता मूल्य अथवा महंगाई सूचकांक के साथ जोड़ा जाए।
मनरेगा वर्करों को 200 दिन का रोजगार उपलब्ध करवाया जाए। न्यूनतम 300 रुपये दिहाड़ी की जाए।
आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। हरियाणा की तर्ज पर वेतन दिया जाए।
प्री-प्राइमरी स्कूलों में आंगनबाड़ी कर्मियों की नियुक्ति की जाए।
फिक्स, टर्म, आउटसोर्स, ठेका, पार्ट टाइम, टेंपरेरी और अनुबंध रोजगार पर अंकुश लगाया जाए।
आठ के बजाय बारह घंटे ड्यूटी करने का फैसला वापस लिया जाए।
कोरोना कॉल में हुई मजदूरों की छंटनी रद्द की जाए।
कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल की जाए।
- मजदूरों के वेतन, ईपीएफ  और ईएसआई की राशि में कटौती ना की जाए।
- किसान विरोधी तीन कानूनों व बिजली विधेयक 2020 को वापस लिया जाए।

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