सीटू के राज्य सम्मेलन में देश में अनुसूचित जाति, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर हमलों के खिलाफ साझा तौर पर आवाज उठाने का संकल्प लिया गया। पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, श्रम कानूनों में बदलाव का विरोध, न्यूनतम वेतन 18 हजार करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। आउटसोर्स भर्तियों, ठेकाप्रथा और अंशकालीन नीति पर रोक लगाने की मांग भी उठी। स्थायी रोजगार और आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने पर छह प्रस्ताव पारित किए गए।
सम्मेलन में महासचिव प्रेम गौतम की रखी गई रिपोर्ट पर 37 प्रतिनिधियों ने करीब छह घंटे तक चर्चा की। शिमला के कालीबाड़ी हाल में 13 से 15 सितंबर तक चलने वाले 13वें सीटू राज्य सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को कार्यवाही जारी रही। दूसरे दिन के दूसरे सत्र में सीटू राज्य कमेटी के सम्मेलन में राज्य के असंगठित कामगारों को एकजुट करने की जरूरत भी महसूस की गई। प्रदेश में जिला और ब्लॉक स्तर पर आउटसोर्स कामगारों को एकजुट कर उनके हकों की लड़ाई लड़ने की बात उठी। असंगठित कामगारों को एकसाथ लेकर राज्य में आंदोलन की रूपरेखा बनाने का संकल्प लिया गया।
सम्मेलन में बिजली, आंगनबाड़ी वर्कर्स संघ, होटल मजदूर यूनियन, उद्योगों से जुड़े कामगार संघ, आशा वर्कर संघ, मिड-डे मील वर्कर्स संघ के नेताओं ने कहा कि निचले स्तर पर संगठन के सदस्य बनाएं जाएं। इस दौरान सीटू के राष्ट्रीय महासचिव कामरेड तपन सेन, डॉ. कश्मीर ठाकुर, जगतराम, प्रेम गौतम, विजेंद्र मेहरा सहित कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।