प्रदेश के ज्यादातर उद्योगों में 22 मार्च के जनता कर्फ्यू के बाद ठेका मजदूरों को कोई वेतन नहीं दिया गया है। शिमला नगर निगम के टुटू स्थित ठोस कचरा प्रबंधन संयंत्र में साढ़े दस हजार रुपये वेतन लेने वाले मजदूरों को मार्च में केवल दो हजार रुपये वेतन दिया गया। केंद्र की 20 व 29 मार्च की अधिसूचनाओं का खुला उल्लंघन हो रहा है, जिसके अनुसार मजदूरों को समय पर बिना कटौती वेतन मिलना चाहिए।
हिमाचल में भी पूरे देश की तरह ही असंगठित क्षेत्र में कार्यरत मनरेगा व निर्माण मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। महासचिव प्रेम गौतम ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों व अन्य मजदूरों के लिए पीपीई किट का प्रबंध किया जाए। श्रमिक कल्याण बोर्ड से जुड़े मजदूरों को चार हजार की राशि एकमुश्त तुरंत जारी की जाए। आउटसोर्स व ठेका मजदूरों के वेतन में कटौती बंद की जाए।