इसी को आधार बनाकर रिपोर्ट आगे सरकार को भेज रही है। यह पहली मर्तबा है जब अपनी ही सरकार में अपने ही जनप्रतिनिधियों के पीछे खुफिया तंत्र लगाना पड़ा है। दो दिन पहले महापौर कार्यालय में मेयर से भी कुछ सवाल पूछे गए हैं। मेयर रिज मैदान पर एक कार्यक्रम में भाग लेने गई थी।
वापस पहुंचने के बाद उनसे अकेले में कार्यालय के भीतर बातचीत की है। बताया जा रहा है कि इनसे पार्षदों की नाराजगी और गुटबाजी को लेकर सवाल पूछे गए। इनके अलावा डिप्टी मेयर राकेश शर्मा से भी पूछताछ करने टीम पहुंची थी, लेकिन वह नहीं मिले।
इसके अलावा वार्डों में भी पार्षदों के काम पर निगरानी रखी जा रही है। जो पार्षद बागी हो सकते हैं, वे सबसे पहले रडार पर हैं।
सूत्रों के अनुसार सीआईडी ने पार्षद आरती चौहान समेत तीन पार्षदों से भी बात की है। इनमें से कुछ पार्षदों से महापौर कार्यालय में पूछताछ की गई है। इनसे पूछा गया कि उनकी नाराजगी का कारण क्या है। जवाब था कि उनके काम नहीं हो रहे।
उनकी फाइलें अटकाई जा रही हैं। वे पार्टी के साथ हैं लेकिन वर्तमान व्यवस्था से खुश नहीं। इनमें से कई भाजपा पार्षद वर्तमान व्यवस्था के खिलाफ सचिवालय में शिकायतें कर चुके हैं तो कई धरना प्रदर्शन तक कर चुके हैं।
सीआईडी सूत्रों के अनुसार पार्षदों से पूछे गए ये सवाल
मेयर-डिप्टी मेयर के खिलाफ इतनी नाराजगी क्यों है?
पार्षदों में क्या चल रहा है, बार-बार विवाद क्यों हो रहे हैं?
किसका व्यवहार ठीक नहीं है, कौन सहयोग नहीं कर रहा?
आप निगम में नेतृत्व के खिलाफ है या फिर पार्टी के?
क्या चाहते हैं निगम में क्या नई व्यवस्था होनी चाहिए?
मेयर बोलीं, पार्षद एक हैं, एकजुट ही रहेंगे- मेयर कुसुम सदरेट ने माना कि सीआईडी के लोग मेरे कार्यालय आए थे। हमने चाय पी। इस दौरान बातचीत भी हुई। कहा कि हम सभी भाजपा पार्षद एक है और एक ही रहेंगे। हम लोग मिलकर काम भी कर रहे हैं।