‘अमर उजाला’ में बिना जनरेटर चल रहे ट्रीटमेंट प्लांट की खबर प्रकाशित
होने के बाद आखिरकार शासन की नींद टूटी। मुख्य सचिव पी मित्रा ने सिंचाई
एवं जन स्वास्थ्य, नगर निगम के अधिकारियों को ट्रीटमेंट प्लांट में जल्द से
जल्द जनरेटर लगाने के निर्देश दिए।
साथ ही शहर में सप्लाई हो रहे पानी के
कम से कम तीन सैंपल लेकर अलग अलग लैंबों से जांच कराने को भी कहा। इसके
अलावा हिदायत दी कि सुपर क्लोरीनेशन के बाद ही पानी की सप्लाई की जाए। राजधानी
शिमला व सोलन में जानलेवा हो चुके पीलिया की रोकथाम के लिए शुक्रवार को
प्रदेश के मुख्य सचिव पी मित्रा ने अधिकारियों की क्लास ली।
बैठक के दौरान
मुख्य सचिव ने सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारियों को
निर्देश दिए कि शहर में की जा रही पेयजल आपूर्ति के दिन में तीन सैंपल
लेना सुनिश्चित करें और उनकी जांच अपनी लैबों के अलावा स्वास्थ्य विभाग की
कंडाघाट स्थित सेंट्रल प्रयोगशाला व अन्य प्रयोगशालाओं में करवाएं।
उन्होंने कहा कि शहर के सभी मुख्य जल भंडारण टैंकों की सफाई भी समय से
कराना सुनिश्चित होना चाहिए। उन्होंने मलयाणा स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट
प्लांट का कार्य सुचारु रूप से चलाने के निर्देश दिए तथा इसकी निगरानी भी
सुनिश्चित बनाने को कहा।
उन्होंने ट्रीटमेंट प्लांट के लिए शीघ्र ही पावर
जनरेटर उपलब्ध करवाने के लिये अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि
गुम्मा और गिरि से आने वाले पानी की सुपरक्लोरीनेशन के बाद ही पेयजल
आपूर्ति करने को कहा। साथ ही उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के
अधिकारियों को नियमित रूप से जल की गुणवत्ता की जांच करने के निर्देश दिए।
शहरी विकास एवं पंचायती राज विभाग व उपायुक्त सोलन को अश्वनी खड्ड कैचमेंट
क्षेत्र की सभी बस्तियों में शौचालय सुविधा के अन्तर्गत लाने के निर्देश
दिए। इसके साथ ही शहर के रिज, पुराने बस स्टैंड व विकास नगर में स्थापित
तीनों एटीएम से लोगों को निशुल्क पेयजल उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं।
बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव पीसी धीमान, नगर निगम के आयुक्त्र
पंकज राय, निदेशक स्वास्थ्य विभाग डा डीएस गुरंग, विशेष सचिव स्वास्थ्य
कुमार नंदिता गुप्ता, उपायुक्त सोलन मदन चैहान, सिंचाई विभाग के इंजीनियर
इन चीफ कंवर और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित
थे।
बताते चलें, 21 जनवरी को ‘अमर उजाला’ ने
हाईकोर्ट के आदेश मानते तो नहीं फैलता पीलिया शीर्षक से खबर प्रकाशित की
थी। बताया था कि हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद बिना जनरेटर के ही प्लांट
चलाया जा रहा था। साथ ही शीट से प्लांट को ढकने के निर्देश को भी नजरंदाज
किया गया।
आधुनिक मशीन से स्लज साफ करने के भी निर्देश दिए थे। इन सब
हिदायतों के बाद भी आईपीएच और नगर निगम दोनों ने ही कोई कदम नहीं उठाया।
इसी का नतीजा रहा कि शिमला व सोलन में हजारों लोगों की जान आफत में आ गई।