हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को उपमुख्यमंत्री समेत सीपीएस की नियुक्ति के मामले की सुनवाई होगी। राज्य सरकार ने याचिका की गुणवत्ता पर सवाल उठाया है। सरकार ने दलील दी है कि सभी याचिकाएं हाईकोर्ट के नियमों के अनुसार दायर नहीं की गई हैं। याचिकाकर्ता ऊना से विधायक सतपाल सिंह सत्ती और 11 अन्य विधायकों ने मामले के अंतिम निपटारे तक सभी सीपीएस को काम करने से रोकने के आदेशों की मांग की है। बता दें कि सीपीएस की नियुक्तियों को तीन याचिकाओं से चुनौती दी है। सबसे पहले वर्ष 2016 में पीपल फॉर रिस्पांसिबल गवर्नेंस संस्था ने सीपीएस को चुनौती दी थी।
नई सरकार की ओर से सीपीएस की नियुक्ति करने पर उन्हें प्रतिवादी बनाए जाने के लिए आवेदन किया गया। उसके बाद मंडी निवासी कल्पना देवी ने भी सीपीएस की नियुक्तियों को लेकर याचिका दायर की गई है। भाजपा नेता सत्ती ने उप-मुख्यमंत्री समेत सीपीएस की नियुक्ति को चुनौती दी है। अदालत सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पंजाब में भी ऐसी नियुक्तियां की गई थीं, जिन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। वर्ष 2006 में हाईकोर्ट भी इन नियुक्तियों को असांविधानिक ठहरा चुका है।