उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के शिमला, भुंतर व गगल में स्थित तीनों हवाई अड्डों का भूमि की अनुपलब्धता के कारण विस्तार नहीं हो पाया। तीनों हवाई अड्डे अत्याधुनिक तकनीक से भी वंचित हैं, जिससे बडे़ विमान नहीं उतर सकते।
उड़ानें भी अनियमित हैं और किराया भी अधिक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी जिला में मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेजों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों सहित आईआईटी खुलने से यहां पर बेहतर कनेक्टिविटी के लिए हवाई अड्डे के निर्माण की नितांत आवश्यकता है।
चीन की सीमाएं हिमाचल प्रदेश के साथ सटी होने के कारण सामरिक दृष्टि से भी यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे का निर्माण किया जाना आवश्यक है। नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने आश्वस्त किया कि प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डे के निर्माण की सभी संभावनाओं का निरीक्षण करके समुचित कदम उठाए जाएंगे।