मंच का आरोप है कि राजधानी के नामी निजी स्कूलों में प्रति छात्र 28 से 48 हजार फीस वसूली जा रही है। स्कूलों में 1800 छात्र भी हैं तो वे साल में अभिभावकों से मनमानी फीस के रूप में 8 करोड़ रुपये कमा रहा है। आरोप हैं कि वर्दी, किताबों के कमीश्न में भी निजी स्कूल 40 लाख तक कमा रहे हैं, टूअर ट्रिप और एक्सपोजर विजिट के नाम भी हजारों वसूले जा रहे हैं।
न्यायालय की सख्ती पर बदला है सिर्फ लूट का तरीका
मंच संयोजक विजेंद्र का आरोप है कि निजी स्कूलों की लूट को रोकने को उच्च न्यायालय की सख्ती और आदेशों के बाद स्कूलों ने सिर्फ लूट का तरीका बदला है। अब फीस बुकलेट से एडमिशन फीस, बिल्डिंग फं ड को हटाकर मगर एनुअल चार्जेज, ट्यूशन फीस, स्मार्ट क्लास रूम फ ीस, मोबाइल मैसेज फीस जैसी कई मदें जोड़ दी गई।
सह-संयोजक बिंदु जोशी का आरोप है कि निजी स्कूलों की ओर से लगाई गई किताबें मनमर्जी के दाम पर खरीदनी पड़ती हैं। वर्दी, स्टेशनरी में भी अभिभावकों के पास मोलभाव कर चार पैसे बचाने का कोई अधिकार नहीं रहता। मार्केट रेट से दो से तीन गुणा दाम पर यह बेची जाती है। इस गोरखधंधे पर भी कोई रोक नहीं है। इसमें निजी स्कूलों का सीधा कमीशन बंधा है।
छात्र अभिभावक मंच के संयोजक विजेेंद्र ने कहा कि 16 मार्च को मंच का प्रतिनिधिमंडल अपने 14 सूत्रीय मांग पत्र को लेकर शिक्षा मंत्री से मिलेगा और इसमें निजी स्कूलों की लूट रोकने, इन पर नकेल कसने और आरटीई जैसे कानून को सख्ती से लागू कर अभिभावकों राहत दिए जाने की मांग उठाई जाएगी। बावजूद इसके यदि लूट रोकने का कार्रवाई न हुई तो मंच आगे आंदोलन को और उग्र करेगा।