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निजी स्कूलों की लूट के खिलाफ शिक्षा निदेशालय के बाहर गरजे अभिभावक

Wed, 13 Mar 2019 06:02 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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निजी स्कूलों की लूट के खिलाफ छात्र-अभिभावक मंच ने शिक्षा निदेशालय के बाहर आवाज बुलंद की। मंच के कार्यकर्ता दो घंटे यहां डटे रहे। संयोजक विजेंद्र मेहरा, सह संयोजक बिंदु जोशी की अगुवाई में संयुक्त निदेशक के माध्यम से शिक्षा निदेशक और सरकार को 14 सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया। प्रदर्शन हरि सिंह पंवर, फालमा चौहान, विकास थापटा, सोनिया सबरवाल, जसबीर कौर, गुरविंद्र कुमार, लक्ष्मी भल्ला, रमेश कुमार, मनविंद्र, लोकेंद्र, संजय और गुरविंद्र कौर सहित अन्य अभिभावकों के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा निदेशक और प्रदेश सरकार से निजी विश्वविद्यालय शिक्षण संस्थानों की तर्ज पर निजी स्कूलों को संचालित और नियंत्रित करने के लिए नियामक आयोग बनाने की मांग की।

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निजी स्कूल संचालन को स्थायी नीति बने, जिसमें फीस से लेकर स्कूल संचालन को लेकर नियम बने और पहले से बने आरटीई, केंद्र सरकार और सीबीएसई एचपी बोर्ड आदि के नियमों को सख्ती से लागू करना सुनिश्चित किया जाए। स्कूलों को एनओसी दिए जाने के समय शपथ पत्र भरवाया जाए, जिसमें उन्हें बाध्य किया जाए कि वे शिक्षा और स्कूल संचालन को बनने कानूनों और नियमों का पालन करेंगे। इनकी अनदेखी करने पर निजी स्कूलों की मान्यता रद्द करने का प्रावधान भी हो। मंच पदाधिकारियों को भरोसा दिया गया कि जल्द इस पर सरकार के स्तर पर कोई फैसला ले लिया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान मंच संयोजक विजेंद्र और बिंदु जोशी ने कहा कि प्रदेश सरकार और विभाग जिस तरह से आम अभिभावकों के साथ हो रही लूट को रोकने और निजी स्कूलों पर नकेल कसने से गुरेज कर रही है, उससे साफ है निजी स्कूल और सरकार की मिली भगत है। 

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28 से 48 हजार तक वसूली जा रही निजी स्कूलों में फीस, कमा रहे करोड़ों 

मंच का आरोप है कि राजधानी के नामी निजी स्कूलों में प्रति छात्र 28 से 48 हजार फीस वसूली जा रही है। स्कूलों में 1800 छात्र भी हैं तो वे साल में अभिभावकों से मनमानी फीस के रूप में 8 करोड़ रुपये कमा रहा है। आरोप हैं कि वर्दी, किताबों के कमीश्न में भी निजी स्कूल 40 लाख तक कमा रहे हैं, टूअर ट्रिप और एक्सपोजर विजिट के नाम भी हजारों  वसूले जा रहे हैं। 

न्यायालय की सख्ती पर बदला है सिर्फ लूट का तरीका 
मंच संयोजक विजेंद्र का आरोप है कि निजी स्कूलों की लूट को रोकने को उच्च न्यायालय की सख्ती और आदेशों के बाद स्कूलों ने सिर्फ लूट का तरीका बदला है। अब फीस बुकलेट से एडमिशन फीस, बिल्डिंग फं ड को हटाकर मगर एनुअल चार्जेज, ट्यूशन फीस, स्मार्ट क्लास रूम फ ीस, मोबाइल मैसेज फीस जैसी कई मदें जोड़ दी गई। 

सह-संयोजक बिंदु जोशी का आरोप है कि निजी स्कूलों की ओर से लगाई गई किताबें मनमर्जी के दाम पर खरीदनी पड़ती हैं। वर्दी, स्टेशनरी में भी अभिभावकों के पास मोलभाव कर चार पैसे बचाने का कोई अधिकार नहीं रहता। मार्केट रेट से दो से तीन गुणा दाम पर यह बेची जाती है। इस गोरखधंधे पर भी कोई रोक नहीं है। इसमें निजी स्कूलों का सीधा कमीशन बंधा है। 

छात्र अभिभावक मंच के संयोजक  विजेेंद्र ने कहा कि 16 मार्च को मंच का प्रतिनिधिमंडल अपने 14 सूत्रीय मांग पत्र को लेकर शिक्षा मंत्री से मिलेगा और इसमें निजी स्कूलों की लूट रोकने, इन पर नकेल कसने और आरटीई जैसे कानून को सख्ती से लागू कर अभिभावकों राहत दिए जाने की मांग उठाई जाएगी। बावजूद इसके यदि लूट रोकने का कार्रवाई न हुई तो मंच आगे आंदोलन को और उग्र करेगा। 
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