गुड़िया प्रकरण से जुड़े कोटखाई थाना हत्याकांड में शिमला के तत्कालीन एसपी डीडब्ल्यू नेगी के खिलाफ आरोपियों को बचाने की साजिश रचने और तथ्यों को छिपाने के आरोप लगे हैं। पुलिस हिरासत में हुई सूरज सिंह नेपाली की हत्या के केस में सीबीआई ने कोर्ट में अनुपूरक चालान पेश कर दिया है।
इसमें नेगी पर तथ्यों को छिपाने और इसमें लीपापोती करने का मुकदमा चलेगा। कोटखाई थाने में गुड़िया दुराचार और हत्या मामले में पुलिस की ओर से बनाए गए आरोपी नेपाली सूरज सिंह की 18 जुलाई की रात लॉकअप में हत्या हो गई थी।
सीबीआई ने यह चालान विशेष न्यायाधीश शिमला की अदालत में प्रस्तुत किया। इस चालान पर स्क्रूटनी 23 फरवरी को होगी। सीबीआई के अधिवक्ता अंशुल बंसल ने इसकी पुष्टि की है। सूरज हत्याकांड गुड़िया दुराचार एवं हत्या मामले से संबंधित है।
छह जुलाई, 2017 को कोटखाई के दांदी जंगल में स्थानीय स्कूल की दसवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा गुड़िया (काल्पनिक नाम) का शव निर्वस्त्र हालत में मिला था। छात्रा चार जुलाई को टूर्नामेंट वाले दिन से ही स्कूल से घर नहीं पहुंची थी। जब यह घटना हुई तो उस वक्त शिमला के पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू नेगी थे।
पहले इस मामले को पुलिस ने दर्ज किया। बाद में तत्कालीन आईजी दक्षिणी रेंज शिमला जहूर एच जैदी के नेतृत्व वाली एसआईटी ने इस मामले की जांच की। पुलिस ने कहानी बनाई कि नेपाली सूरज सिंह के अलावा पांच लोग गुड़िया के साथ सामूहिक दुराचार में शामिल रहे और इन्हीं ने उसकी हत्या की।
एक अन्य स्थानीय युवक को भी सह आरोपी बनाया गया। इसी बीच 18 जुलाई की रात को कोटखाई थाने में आरोपी सूरज सिंह की हत्या हो गई। उसकी हत्या का आरोप पुलिस ने दूसरे आरोपी राजू पर मढ़ा। बाद में जनता के सड़क पर उतरने के बाद जब मामले की जांच सीबीआई को दी गई तो पुलिस की कहानी गलत साबित हो गई।
kotkhai gangrape case
सीबीआई ने पाया कि सूरज सिंह की हत्या पुलिस के थर्ड डिग्री रिमांड से हुई। गुड़िया मामले में भी पुलिस के आरोपियों से सीबीआई सहमत नजर नहीं आई। सीबीआई ने पुलिस हिरासत हत्याकांड में पहले आईजी जहूर एच जैदी समेत आठ पुलिस वालों को गिरफ्तार किया।
बाद में शिमला के पूर्व एसपी नेगी को भी गिरफ्तार किया। आठ पुलिस वालों के खिलाफ चालान पहले ही कोर्ट में पेश किया जा चुका है। अब पूर्व एसपी नेगी के खिलाफ भी चालान पेश किया गया है। इसमें भी आईपीसी की धारा 302 समेत तमाम वे धाराएं हैं जो आठों पुलिस वालों के खिलाफ लगी हैं। यह सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में चल रहे हैं। मंगलवार को भी ये अदालत में पेश किए गए, जहां इनकी न्यायिक हिरासत और आगे बढ़ा दी गई।
हत्या के बाद देर रात को जैदी के घर गए थे नेगी
सीबीआई जांच के मुताबिक कोटखाई थाने के लॉकअप में सूरज की हत्या इस मामले के दूसरे आरोपी रहे राजू ने नहीं की। यह हत्या पुलिस वालों ने ही पूछताछ के दौरान की। इस हत्या के लिए थाना प्रभारी राजेंद्र सिंह समेत अन्य पुलिस वालों को जिम्मेवार ठहराया गया है। यह पूछताछ डीएसपी मनोज जोशी की निगरानी में एसआईटी के सदस्य कर रहे थे।
इस एसआईटी के प्रमुख जहूर एच जैदी थे। हत्या के बाद देर रात को पहले डीएसपी जोशी शिमला के तत्कालीन एसपी नेगी के घर आए। उसके बाद एसपी नेगी और डीएसपी जोशी आईजी जहूर एच जैदी के पास गए। जैदी को पूरी बात बताने के बाद पुलिस वालों ने गुड़िया मामले के आरोपी राजू पर ही हत्या का केस बनाने का फैसला लिया। इसके बाद झूठा मुकदमा बनाया गया और इस मामले में लीपापोती की गई।
आईपीसी की इन धाराओं में चलेगा मुकदमा
पहला चालान निलंबित आईजी जहूर एच जैदी और अन्य पुलिस वालों के खिलाफ 26 नवंबर 2017 को पेश किया था। यह चालान 360 पृष्ठों में आईपीसी की धारा 302, 330, 331, 348, 323, 326, 218, 195, 196, 201 और 120 बी धाराओं में पेश किया। अब पूर्व एसपी के खिलाफ भी इन्हीं धाराओं में अनुपूरक चालान पेश किया गया है। ये करीब 15 पृष्ठों का है।