एचआरटीसी प्रबंधन नाइट बस सर्विस में चार घंटे की कटौती करने जा रहा है। शहर में एचआरटीसी की ओर से शुरू की नाइट बसें अब रात को 12 बजे तक और सुबह 4 बजे से चलेंगी। नाइट बस सर्विस के ट्रायल के दौरान रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच बसों को यात्री न मिलने से यह फैसला लिया है। क्षतिग्रस्त सर्कुलर रोड की बहाली पर बसों का संचालन निर्भर करेगा।
होली के मौके पर एचआरटीसी की ओर से शहर में शुरू की नाइट बस सर्विस के समय में प्रबंधन ने कटौती का फैसला लिया है। होली पर एचआरटीसी प्रबंधन ने पंद्रह दिन के ट्रायल पर शहर में पूरी रात के लिए नाइट बस सर्विस शुरू की थी। ट्रायल के दौरान देर रात एचआरटीसी बसों को लोकल रूटों पर सवारियां नहीं मिली।
कई बार तो बसें शहर की सड़कों पर खाली ही दौड़ती रहीं। पूरी रात बसों का संचालन करने के लिए किया ट्रायल सफल न होने पर अब प्रबंधन ने रात को 12 बजे तक और सुबह 4 बजे से बसें चलाने का फैसला लिया है।
रात 12 बजे तक चलेंगी नाइट बसें- नाइट बस सर्विस रात 12 बजे तक चलेगी। सुबह बसें 4 बजे से रूटों पर चलना शुरू हो जाएंगी। ट्रायल के दौरान रात 12 बजे से सुबह 4 बजे के बीच बसों को यात्री नहीं मिले हैं।
देवासेन नेगी क्षेत्रीय प्रबंधक, एचआरटीसी
आईजीएमसी गेट तक कनेक्टिविटी देंगी बसें- एचआरटीसी की रात 12 बजे तक और सुबह 4 बजे से चलने वाली नाइट बस सर्विस इंदिरागांधी मेडिकल कालेज के गेट तक कनेक्टिविटी देंगी। हर एक घंटे बाद आईएसबीटी से ओल्ड बस स्टैंड होेते हुए बसें आईजीएमसी गेट पर पहुंचेगी। एचआरटीसी की इस पहल से आईजीएमसी आने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। रात के समय लोग टैक्सी वालों के हाथों लूटने से बचेंगे।
नाइट कंट्रोल रूम से रहेगी बसों पर नजर- टूटीकंडी आईएसबीटी स्थित एचआरटीसी के कंट्रोल रूम को नाइट बस सर्विस के लिए बतौर नाइट कंट्रोल रूम इस्तेमाल किया जाएगा। एचआरटीसी के टोल फ्री नंबर 12666 पर फोन कर लोग बस की लोकेशन का पता कर सकेंगे। बस आईएसबीटी से कितने बजे किस रूट पर रवाना हुई है इसकी पूरी जानकारी टोल फ्री नंबर पर उपलब्ध करवाई जाएगी।
बाहरी क्षेत्रों से पहुंचने वालों के लिए बड़ी राहत- बाहरी क्षेत्रों से रात के समय शिमला पहुंचने वाले लोगों को नाइट बस सर्विस से सबसे अधिक लाभ होगा। अभी तक बाहरी क्षेत्रों से आने वाले लोगों को टूटीकंडी आईएसबीटी से शहर के उपनगरों के लिए बसें नहीं मिलती थीं। लोगों को बाहरी क्षेत्रों से शिमला पहुंचने के लिए कम किराया खर्च करना पड़ता था और आईएसबीटी से उपनगरों तक पहुंचने के लिए टैक्सी पर अधिक खर्च होता था।