राजकीय उच्च पाठशाला सपाहण में शारीरिक शिक्षा अध्यापक (पीईटी) का पद खाली होने के बाद भी विद्यार्थियों ने कमाल कर दिखाया है। बिना पीईटी विद्यार्थियों ने कबड्डी प्रतियोगिता, 200 और 400 मीटर की दौड़ में दो रजत और एक कांस्य पदक जीता है। विजेता खिलाड़ियों का विद्यालय में भव्य स्वागत किया गया। बच्चों की मेहनत के दम पर मिली जीत पर शिक्षक भी जमकर नाचे।
पदक जीतकर लौटे खिलाड़ी छात्रों को मलाल रहा कि अगर स्कूल में शारीरिक शिक्षक होता तो वे स्वर्ण पदक भी जीत सकते थे। वर्तमान स्कूल में शारीरिक शिक्षक समेत पीईटी, टीजीटी आर्ट्स और भाषा अध्यापक के पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसका खामियाजा विद्यालय में शिक्षारत 57 विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है।
स्कूल में हड़ला पंचायत के गांव सपाहण, बंजवाड़, गुनु, बनोटू, हड़ला, भरान, तलाई, कन्हार, धुरासप्पड़ से विद्यार्थी पढ़ने के लिए पहुंचते हैं। स्कूल प्रबंधन समिति ने रिक्त पदों को भरने की मांग सरकार से उठाई है। शिक्षा उपनिदेशक प्यार सिंह चाढ़क ने बताया कि सरकार के आदेशानुसार स्कूलों में रिक्त पद भर दिए जाएंगे।
स्कूल में शारीरिक शिक्षा अध्यापक, पीईटी, टीजीटी आर्ट्स और भाषा अध्यापक के पद लंबे समय से रिक्त हैं। कई बार पद भरने की मांग उठाई गई, लेकिन, कुछ नहीं हुआ। शारीरिक शिक्षक न होने से बच्चों की खेल प्रतिभा नहीं निखर पा रही है। सरकार और विभाग रिक्त पदों को जल्द भरें।
- रमेश कुमार, उपप्रधान हड़ला पंचायत
अध्यापकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई और खेल गतिविधियों में बच्चे निपुण नहीं हो पा रहे हैं। सरकार रिक्त पद भरती है तो क्षेत्र के स्कूली बच्चों को लाभ मिलेगा। वर्तमान में तैनात अध्यापकों को ही अन्य विषयों की कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं। इससे काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
- बलदेव, वार्ड सदस्य
स्कूलों में बेहतर शिक्षा के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ और ही दिखता है। सपाहण स्कूल वर्ष 2010 में स्तरोन्नत हुआ। तब से लेकर वर्तमान समय तक विद्यालय में शारीरिक शिक्षक की तैनाती नहीं हो पाई है। इससे बच्चों की प्रतिभा दबकर रह गई है।
- मान सिंह, ग्रामीण
विद्यार्थी मीलों का सफर तय कर पढ़ाई के लिए सपाहण स्कूल पहुंचते हैं। अध्यापकों के पद रिक्त होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पद भरने के लिए कई बार शिक्षा विभाग को ग्राम सभा से प्रस्ताव पारित कर भी भेजे, लेकिन अभी तक पदों को नहीं भरा जा सका है।
- घिंद्र सिंह, ग्रामीण