भट्ठाकुफर फल मंडी के बाहर दो घंटों तक बारिश के बीच सैकड़ों बागवान बीच सड़क पर नारेबाजी कर सेब की फसल बिकवाने का आग्रह करते रहे लेकिन प्रशासन लापरवाही की नींद सोया रहा। बागवानों की मांग थी कि प्रशासन का कोई नुमाइंदा मौके पर आए और मंडी में सेब की खरीद फरोख्त का काम शुरू करवाए लेकिन बागवानों की एक न सुनी गई।
शनिवार सुबह मंडी में ऑक्शन यार्ड के बाहर ट्राले खड़े थे। गेट पर लोहे की चेन लगाकर सेब की गाड़ियों की एंट्री रोक दी गई थी। सेब से लदी गाड़ियों की कतार फल मंडी के गेट से ढली टनल की ओर करीब एक किलोमीटर तक लगी थी। फल मंडी में मौजूद आढ़तियों के प्रतिनिधि बागवानों को माल बेचने का आश्वासन देते रहे लेकिन जब काम शुरू नहीं हुआ तो दोपहर करीब 12 बजे बागवान मंडी परिसर से बाहर निकल कर सड़क पर आ गए।
इससे पहले सुबह करीब 10 बजे एपीएमसी चेयरमैन मंडी पहुंचे और हड़ताल खत्म करने के लिए आढ़ती एसोसिएशन और मजदूर यूनियन के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए अपने कार्यालय बुलाया। मंडी समिति के कार्यालय में बैठक चलती रही और बागवान बारिश में सड़क पर नारे लगाते रहे। 1:28 बजे आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान मंडी के बाहर प्रदर्शन कर रहे बागवानों के पास पहुंचे और हड़ताल खत्म होने की सूचना दी लेकिन बागवान अड़े रहे और प्रशासन के किसी अधिकारी को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे।
1:42 बजे एपीएमसी के चेयरमैन मौके पर पहुंचे और बागवानों की शिकायतें सुनीं। इनके पीछे पुलिस क्यूआरटी भी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई और ट्रैफिक जाम खुलवाया। जाम में आर्मी ट्रक और स्कूल टैक्सी भी फंसी रहीं। हालांकि जो गाड़ियां मंडी के पास पहुंची बागवानों ने उन्हें नहीं रोका। कुछ स्कूली बच्चे गाड़ियों से उतर कर पैदल ही घर पहुंचे।