उन्होंने कहा कि आईआईटी कमांद की स्थापना 2010 में हुई थी और यह संस्थान पिछले पांच वर्षों में पूरी तरह से तैयार होकर छात्रों को शिक्षा देने का कार्य कर रहा है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग और निदेशक आईआईटी मंडी अपनी मनमर्जी से ठेकेदारों का चयन कर रहे हैं।
गुणवत्ता पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वित्तीय नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। इन्हीं कारणों से दो वर्ष पूर्व आईआईटी कमांद में पांच लोगों की हत्या हुई थी।
उन्होंने कहा कि आए दिन आईआईटी कमांद में स्थानीय लोग धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। यही नहीं, अब तो आईआईटी कमांद में कार्यरत अधिकारी व कर्मचारी धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन निदेशक की मनमर्जी अब भी जारी है।