कृष्ण ठाकुर, मोनू, अजय शर्मा, वेद प्रकाश शुक्ला।
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दाड़लाघाट में अंबुजा सीमेंट कंपनी और ट्रक ऑपरेटरों के बीच मालभाड़े को लेकर उपजे विवाद को 15 दिन हो गए हैं। इस बीच ट्रक ऑपरेटरों से जुड़े मेकेनिक, स्पेयर पार्ट्स, पेट्रोल पंप, हाईवे से सटे ढाबों पर तालाबंदी की नौबत आ गई है। 15 दिनों में ही 85 फीसदी तक कारोबार घट गया है। वहीं, ढुलाई कार्य में लगे सैकड़ों ट्रक अभी भी खड़े हैं। सरकार द्वारा गठित सब कमेटी के साथ होने वाली बैठक का ट्रक ऑपरेटर इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, फैसला उनके ही हक में होगा, इसकी उम्मीद उन्हें कम ही है।
बाहर से मंगवाना पड़ रहा सीमेंट
काम आधा हो गया है। स्टोर खाली हो गए थे। मजबूरी में बाहर से एशियन कंपनी का ड्यूरा साइन सीमेंट मंगवाना पड़ रहा है। अंबुजा और एसीसी के अभाव में कई अन्य डीलरों को भी यही सीमेंट बेचना पड़ रहा है। गतिरोध लंबा चला तो सारा काम चौपट हो जाएगा। - वेद प्रकाश शुक्ला, अंबुजा सीमेंट डीलर दाड़लाघाट
दिन भर में बिक रहा मात्र 500 लीटर डीजल
कंपनी में तालाबंदी से पहले रोजाना 8,000 लीटर डीजल बिकता था। अब मुश्किल से 500 लीटर डीजल ही बेच पा रहे हैं। एक करोड़ से ऊपर की लेनदारी मार्केट में फंस गई है। लगभग 600 ट्रक रोजाना उधार तेल भरवाते थे, जो आजकल खड़े हो गए हैं। 15 कर्मचारी हैं, जिन्हें मजबूरन घर भेजना पड़ रहा है। बैंकों की लिमिट का पैसा भी चुकता नहीं हो पा रहा है, जिसे अतिरिक्त ब्याज के साथ चुकता करना पड़ेगा। - कृष्ण ठाकुर, पेट्रोल पंप मालिक छामला
पांच फीसदी काम ही हो रहा
पांच फीसदी काम ही रह गया है। अधिकांश ढाबा संचालक घर चले गए हैं। बिजली का बिल, दुकान का किराया, नौकरों की सैलरी और घर का खर्च निकालना मुश्किल हो गया है। जल्द कंपनी नहीं खुली तो राशन लेना भी मुश्किल हो जाएगा। अब कारोबार न के बराबर हो रहा है। पूरा दिन बाजार खाली रहता है। - मोनू, मिठाई विक्रेता दाड़लाघाट
नहीं हो रहा है काम
मोबाइल रिपेयर और अखबार बेचने का काम करता हूं। बीते 15 दिनों से ग्राहक नहीं आ रहे हैं। जिनके मोबाइल रिपेयर किए हैं, वे भी नहीं आ रहे हैं। उधार के पैसे भी फंस गए हैं। अगर ऐसे ही चलता रहा तो काम पूरी तरह चौपट हो जाएगा। - अजय शर्मा, कारोबारी दाड़लाघाट