धार्मिक नगरी मणिकर्ण में पर्यटकों का हुड़दंग चिंता का विषय है। मणिकर्ण में तनाव का माहौल न हो, इसके लिए जरूरी है यहां हथियार लेकर आने वालों पर पाबंदी लगाई जाए। यह बात पूर्व सांसद महेश्वर सिंह ने सोमवार को उपायुक्त से मणिकर्ण मामले को लेकर की गई मुलाकात में कही। घाटी के अन्य प्रतिनिधियों के साथ उपायुक्त कार्यालय पहुंचे महेश्वर ने कहा कि बाहरी राज्यों से खुले हथियार लेकर आने वाले पर्यटकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। मणिकर्ण में हुड़दंग का मामला संगीन है। इससे स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ सरकार को सीख लेने की जरूरत है, जिससे आने वाले समय में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
उन्होंने कहा कि बैसाखी पर्व आने वाला है, जिसके चलते पंजाब के श्रद्धालुओं का मणिकर्ण गुरुद्वारा साहिब में आना लगा रहेगा। इस दौरान हथियार लेकर कोई भी यहां न पहुंचे, इसको लेकर बैठक कर व्यवस्था बनाने की जरूरत है। गुरुद्वारा प्रबंधन और स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि व अन्य प्रतिनिधियों के साथ बैठक करके यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति हथियार लेकर घाटी में प्रवेश न करे। उन्होंने पिछले दिनों जरी में एक युवक पर पर्यटकों के हमले पर चिंता जताई।
मणिकर्ण में पंजाब के पर्यटकों के हुड़दंग मामले में जांच तेज हो गई है। हालांकि एसआईटी के मुख्य रेंज के डीआईजी मधुसूदन शर्मा वापस लौट गए हैँ। पार्वती घाटी के मणिकर्ण में हुड़दंग करने वाले लोगों की पहचान के लिए पुलिस अब सीसीटीवी कैमरों का विश्लेषण कर रही है। पुलिस करीब 12 से अधिक सीसीटीवी कैमरों में कैद हुड़दंगियों की पहचान कर रही है। वहीं, पांच मार्च की रात के वायरल वीडियो को भी जांच के लिए शिमला भेजा गया है। पीएनबी के एटीएम, शिव मंदिर, राम मंदिर, गुरुद्वारा गेट सहित कई अन्य जगहों के सीसीटीवी कैमरों का विश्लेषण किया जा रहा है।
भले ही मामले को एक सप्ताह का समय हो गया है, लेकिन स्थानीय लोग अभी भी सहमे हुए हैं। वह पुलिस व सरकार से धार्मिक नगरी की शांति को भंग करने वाले पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उधर, हुड़दंग करने वाले आरोपी अभी पुलिस की पहुंच से दूर हैं। ऐसे में पंचायती राज संस्था के जनप्रतिनिधि भी खुलकर अपनी बात कह रहे हैं। बरशैणी वार्ड की जिला परिषद सदस्य रेखा गुलेरिया ने कहा कि मणिकर्ण की घटना को अब नौ दिन बीत चुके हैं लेकिन अभी तक सरकार की ओर से हुड़दंगियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई है। इस घटना के बाद घाटी के लोगों में रोष है।