चुनाव की संवेदशीलता को देखते हुए सीबीआई ने हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से अति गोपनीय तरीके से पूछताछ की कानूनी कार्रवाई पूरी कर दी।
मुंबई स्थित स्टील कंपनी से कथित रूप से 2.8 करोड़ लेने के मामले में पिछले हफ्ते वीरभद्र सिंह को दिल्ली बुलाया गया था।
सीबीआई के एक गेस्टहाउस में उनके बयान दर्ज किए।
पूछताछ के लिए प्रशांत भूषण की याचिका और अरुण जेटली द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र को आधार बनाया गया।
सीबीआई आधिकारिक तौर पर इस बारे में कोई बयान नहीं दे रही। हालांकि अफसर पुष्टि कर रहे हैं कि वीरभद्र सिंह ने पूछताछ में पूरा सहयोग दिया।
क्या है मामला
वीरभद्र पर आरोप है कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री रहते हुए कंपनी को फायदा पहुंचाने के एवज उन्होंने करोड़ों रुपये लिए।
सीबीआई ने पिछले साल अक्तूबर में स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन (एसटीसी) की शिकायत पर प्राथमिकी (पीई) दर्ज की थी।
एसटीसी ने अपने कुछ अधिकारियों को मिले मोटी रकम की जांच करने को कहा था।
उस जांच के तार वीरभद्र सिंह से जुड़े।
भाजपा नेता अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सीबीआई को लिखी चिट्ठी में इसकी निष्पक्ष जांच की बात कर मामले को सार्वजनिक कर दिया था।
इससे पहले वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण भी इस बारे में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।
न समन जारी हुआ, न पूछताछ : वीरभद्र
बिलासपुर में चुनावी सभाओं के दौरान झंडूता में मुख्यमंत्री वीरभद्र ने कहा कि इस केस में सीबीआई को उन्होंने स्वयं जांच के लिए कहा था।
जहां तक समन जारी होने की बात है तो इसकी उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं है। बुलाकर पूछताछ करने की बात भी निराधार है। वह पहले ही इस बारे में जवाब और दस्तावेज दे चुके हैं।
भाजपा ने फिर मांग लिया इस्तीफा
हिमाचल भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से इस्तीफा मांगा है।
उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री रहते जांच और जांच एजेंसियों को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्हें तुरंत इस्तीफा देकर जांच में सहयोग करना चाहिए। वीरभद्र सिंह बताएं कि क्या सीबीआई ने उन्हें अपने कार्यालय के गेस्ट हाउस में पूछताछ के लिए बुलाया था?