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फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत की गुत्थी सुलझाने में खुद उलझी सीबीआई

Sun, 19 Nov 2017 01:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत की जांच में जुटी सीबीआई हत्या-आत्महत्या की गुत्थी में उलझ गई है। कोर्ट के आदेश पर भले ही सीबीआई ने आत्महत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की हो लेकिन उसे अभी तक न तो हत्या और न ही आत्महत्या के लिए उकसाने का एक भी सबूत हाथ लगा है।
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यही कारण है कि जिन आरोपियों को हिमाचल पुलिस ने जेल भेज दिया था उन्हें सीबीआई की अदालत से ही जमानत मिल गई। सूत्रों की मानें तो जहर खरीदने वाली दुकान के अलावा सुसाइड नोट हत्या के एंगल से जांच करने में बड़ा रोड़ा है। यही कारण है कि सीबीआई पहले सुसाइड नोट की सत्यता परखने में जुटी है।

चूंकि इस मामले में होशियार के तीन सुसाइड नोट बरामद हुए थे, ऐसे में आत्महत्या के लिए उकसाने की थ्योरी को उसी से साबित किया जाना था।

सूत्रों का कहना है कि सुसाइड नोट की लिखाई की जांच कराई जा रही है ताकि हत्या के आरोपों को लेकर बनी उहापोह की स्थिति साफ हो सके। हालांकि उनका यह भी कहना है कि लिखाई अगर मिल जाती है तो भी सीबीआई उन आरोपियों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में भी गिरफ्तार नहीं कर सकते है।
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न‌हीं मिल पा रहा कनेक्शन

दरअसल, होशियार की मौत के बाद उसके कमरे और सामान से तीन सुसाइड नोट बरामद हुए थे। इनमें कुछ वन कर्मियों व वन माफिया का नाम दर्ज था और लिखा था कि ये लोग गैर कानूनी कार्य कर रहे हैं। साथ ही आत्महत्या करने की बात भी लिखी हुई थी।

हालांकि इन नोट्स में कहीं भी आरोपियों और आत्महत्या करने के बीच का कनेक्शन न तो सीआईडी को मिल पाया और न ही सीबीआई को मिल पा रहा है। यही कारण है कि सीआईडी की जांच में आत्महत्या के लिए उकसाने की थ्योरी साबित नहीं हो पा रही थी।

वहीं, सीआईडी से पहले जांच में जुटी पुलिस ने पब्लिक के दबाव में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में उन सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया था जिनके नाम उस सुसाइड नोट में लिखे हुए थे।

इसके बावजूद लोगों का लगातार कहना था कि मामले में गलत जांच हुई है और हत्या के मामले को पुलिस और सीआईडी घुमा रहे हैं। इसी के बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच करने के आदेश दिए थे।
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