बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में कई बड़े लोग नप सकते हैं। कई नेताओं और अफसरों के रिश्तेदारों पर भी आंच आ सकती है। हिमाचल में अधिकांश ऐसे संस्थान हैं जो नेताओं और अफसरों के रिश्तेदारों के हैं। अगस्त 2018 में यह मामला सीबीआई को सौंपा जाना था लेकिन माना जा रहा है कि आंतरिक दबाव के चलते इस मामले पर कार्रवाई में देरी हुई है। सीबीआई ने बुधवार को इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है।
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र लाहौल स्पीति में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति राशि नहीं मिलने की शिकायतें मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने इस मामले की छानबीन की। इस जांच में प्रदेश के कई इलाकों में फर्जी दाखिले से छात्रवृत्ति राशि के नाम पर कथित घोटाला होने की बात सामने आई। कथित घोटाले की राशि 250 करोड़ रुपये से अधिक की बताई जा रही है।
शिक्षा विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट के मुताबिक बीते चार साल में 2.38 लाख विद्यार्थियों में से 19,915 को चार मोबाइल फोन नंबरों से जुड़े बैंक खातों में छात्रवृत्ति राशि जारी कर दी गई। 360 छात्रों की छात्रवृत्ति चार ही बैंक खातों में ट्रांसफर की गई। 5729 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में तो आधार नंबर का प्रयोग तक नहीं किया गया। छात्रवृत्ति आवंटन में निजी शिक्षण संस्थानों ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया। वर्ष 2013-14 से लेकर 2016-17 तक शिक्षा विभाग ने भी किसी भी स्तर पर छात्रवृत्ति योजनाओं की निगरानी नहीं की।
दो दर्जन से ज्यादा शिक्षण संस्थान संचालकों पर गिर सकती है गाज
छात्रवृत्ति घोटाले में दो दर्जन से ज्यादा शिक्षण संस्थान संदेह के घेरे में हैं। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में कथित घोटाला होने के मामले की प्रारंभिक जांच में राज्य के ये निजी शिक्षण संस्थान शक के घेरे में आ गए हैं।