सीबीआई के मुताबिक जांच में पता चला है कि बिहार के दो आरोपियों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों की चोरी कर दुरुपयोग की साजिश रची। विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से मंडी, कांगड़ा, चंडीगढ़, पंचकूला, जीरकपुर, मोहाली सहित अन्य स्थानों पर 3 से 5 लाख रुपये में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाए। जांच में यह भी पता चला है कि इस अवधि में आरोपियों के बैंक खातों में लगभग 1.25 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। यह भी खुलासा हुआ है कि बिहार, यूपी, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा में स्थित संगठित गिरोहों का प्रश्नपत्र लीक करने में संबंध था।
निजी संस्थानों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध
जांच में पाया गया है कि नालंदा (बिहार), कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश), रोहतक (हरियाणा), दिल्ली और जम्मू में विभिन्न निजी संस्थान चलाने वाले व्यक्तियों ने सांठगांठ की। उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए हैं। जांच के दौरान इन संस्थानों की भूमिका सामने आई है, इसलिए उनके नाम राष्ट्रीय परीक्षा (एनटीए) को उचित कार्रवाई के लिए भेजे जा रहे हैं।
केंद्रीय अधिकारियों की संलिप्तता भी आई सामने
जांच के दौरान भारतीय रेलवे, हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों, तत्कालीन जेई और जेओए (विद्युत बोर्ड) हिमाचल प्रदेश, तत्कालीन चंडीगढ़ पुलिस के कांस्टेबल, तत्कालीन दिल्ली सरकार के कुछ अधिकारी, एक पूर्व सैनिक और रक्षा लेखा और लेखा परीक्षा विभाग के एक तत्कालीन अधिकारी की भूमिका भी सामने आई है।