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सावधान: कूल लिप की जकड़ में स्कूली बच्चे, देखा-देखी में लगा बैठे लत, अस्पताल में हर माह आ रहे 10 मामले

Fri, 20 Jun 2025 02:20 PM IST
Krishan Singh सचिन चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला

सार

 धर्मशाला अस्पताल में हर माह इस तरह के 10 के करीब मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा 14 से 19 वर्ष के बच्चे इस नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। 
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डॉक्टर - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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स्कूलों के विद्यार्थी अब देखा-देखी में कूल लिप जैसे तंबाकू पदार्थ की लत में फंस रहे हैं। लड़के ही नहीं, लड़कियां भी इसकी चपेट में मिली हैं। धर्मशाला अस्पताल में हर माह इस तरह के 10 के करीब मामले सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा 14 से 19 वर्ष के बच्चे इस नशे की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका खुलासा धर्मशाला अस्पताल में कार्यरत किशोर परामर्शदाता रीना कुमारी ने किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल में पहले शराब और धूम्रपान को छुड़वाने के लिए अभिभावक और बच्चे आते थे, लेकिन कुछ समय से कूल लिप की लत छुड़वाने के लिए बच्चे अपने परिजनों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

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हालात ऐसे हैं कि हर दूसरा बच्चा कूल लिप लगा रहा है। किशोर परामर्शदाता ने बताया कि जब वह और उनकी टीम स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग के लिए जाती है तो वहां अधिकतर छात्राएं उनसे पूछती हैं कि कूल लिप लगाने से किसी प्रकार का कोई जोखिम तो नहीं हैं और इसके क्या दुष्परिणाम हैं। जब उनसे पूछा गया कि कूल लिप की आदत उन्हें कैसे लगी तो बच्चियों ने बताया कि पहले मजे-मजे में इसका इस्तेमाल किया और इसकी लत लग गई।

कूल लिप जैसे तंबाकू के पदार्थ आसानी से बाजारों में उपलब्ध हैं। प्रतिबंध के बाद भी दुकानों में यह आसानी से मिल रहा है। न तो सिगरेट-बीड़ी की तरह इससे धुआं निकलता है और न शराब की तरह है। कोई भी बच्चा स्कूल में इसे आसानी से ले जाता है। पुलिस की ओर से समय-समय पर दुकानों का निरीक्षण भी किया जा रहा है। मगर बावजूद इसके स्कूलों के पास दुकानों में यह पदार्थ आसानी से बिक रहे हैं। 

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 दुष्प्रभाव 
कूल लिप के साथ किसी भी प्रकार के तंबाकू के सेवन से शरीर के कई अंगों पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है। तंबाकू का सेवन मुंह, गले, फेफड़े, अन्नप्रणाली, मूत्राशय, पेट, गुर्दे, अग्नाशय, और रक्त कोशिका सहित शरीर के कई हिस्सों में कैंसर का खतरा बढ़ाता है। इससे फेफड़ों की बीमारी, जैसे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस और वातस्फीति और अस्थमा का खतरा भी बढ़ जाता है। लिए अभिभावक और बच्चे आते थे, लेकिन कुछ समय से कूल लिप की लत छुड़वाने के लिए बच्चे अपने परिजनों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि हर दूसरा बच्चा कूल लिप लगा रहा है। 
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बच्चों को ऐसे बचा सकते हैं नशे से
क्षेत्रीय अस्पताल धर्मशाला की किशोर परामर्शदाता रीना कुमारी ने बताया कि बच्चों को अभी इसके दुष्प्रभावों के बारे में पता नहीं है। वे केवल एक-दूसरे को देखकर इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों के बैग और जेबों की जांच करते रहें। अगर किसी के पास यह पाया जाता है तो उसे अस्पताल लेकर आएं, ताकि बच्चों को इससे होने वाली हानि और नुकसान के बारे में बताया जा सके, ताकि बच्चे इस गलत आदत को छोड़ सकें। साथ ही परिजन भी बच्चों को प्यार से समझाएं कि यह उनके लिए सही नहीं है।
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