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Shimla News: कुत्तों और बंदरों से ही नहीं, बिल्लियों से भी रहें सावधान, बढ़ रहे काटने के मामले

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छह माह में 253 पीड़ित पहुंचे डीडीयू जोनल अस्पताल आईजीमसी में एक माह में 129 आए केट बाइट के मामले
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बंदर के काटने के भी बढ़ रहे है केस, चिंताजनक है स्थिति

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में कुत्ते और बंदर ही नहीं अब बिल्लियों के काटने का भी लोग शिकार हो रहे हैं। बिल्लियों के काटने के बाद भी पीड़ित अस्पताल पहुंच रहे हैं। हालात ये है कि छह माह में शिमला के दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में 253 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। इसके अलावा इंदिरा गाधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी 129 मामले एक माह में आए है। इससे स्थिति चिंताजनक बन रही है।
वहीं, राजधानी में आतंकी बंदरों के भी काटने के मामले बढ़े हैं। आईजीएमसी में मंकी बाइट के 126 मामले एक माह में आ रहे हैं जबकि डीडीयू में भी 74 मामले आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पालतु जानवरों को रखने के लिए लोगों को उनका वैक्सीनेशन करवाने का आग्रह किया है ताकि रेबीज का खतरा कम हो सके। इसके अलावा इनके काटने पर लोगों को तुरंत अस्पताल आने के लिए भी कहा है। ताकि एंटी रेबीज वैक्सीन को समय पर लगाया जा सके।
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बिल्ले या अन्य जानवर के काटने पर क्या करें
नल के बहते पानी के नीचे घाव को हल्के साबुन से कम से कम पांच मिनट तक साफ करें।
-यदि ज्यादा खून बह रहा हो, तो साफ कपड़े या पट्टी से घाव पर हल्का दबाव डालें।
-सफाई के बाद किसी एंटीसेप्टिक लोशन या क्रीम का इस्तेमाल करें।
-घाव को कसकर न बांधें, रगड़ें नहीं, या हाइड्रोजन पेरोक्साइड का इस्तेमाल न करें।
-तुरंत बाद चिकित्सीय सलाह लें और टीकाकरण करवाएं।

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लोगों को समय-समय पर जागरूक किया जाता है कि अगर बिल्ली, बंदर या कुत्ता अगर काट ले तो तुरंत अस्पताल का रुख करें। समय पर टीकाकरण करवाए जाने से रेबीज के खतरे को कम किया जा सकता है। -डॉ. यशपाल रांटा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, शिमला।
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