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Shimla News: महिला आयोग में जल्द निपटेंगे मामले, अध्यक्ष समेत सदस्य भी लगाएंगी अदालतें

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800 लंबित मामलों के त्वरित निपटारे की तैयारी
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जुलाई तीन सदस्य भी लगाएंगी अदालत
प्रताड़ना, शोषण से पीड़ित महिलाओं को नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार
खास खबर
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राज्य महिला आयोग ने पीड़ित महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए सदस्यों को शक्तियों का हस्तांतरण करने का निर्णय लिया है। इस पहल से प्रताड़ना और शोषण से पीड़ित महिलाओं को अब लंबी तारीखों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इस व्यवस्था के अंतर्गत जुलाई से आयोग की अध्यक्ष सहित तीन सदस्य भी अदालतें लगाएंगे। इसके अनुसार हर महीने छह या उससे अधिक अदालतें आयोजित की जा सकेंगी। यह कदम महिलाओं के मामलों के निपटारे में तेजी लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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पहले मामलों की सुनवाई में काफी समय लग जाता था। महिलाओं को ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों से सुनवाई के लिए आना पड़ता था और कई तारीखें मिलती थीं। शक्तियों के हस्तांतरण से कार्यभार का बेहतर वितरण हो सकेगा और आयोग की कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी बनेगी। इससे महिलाओं को न्याय के लिए बार-बार भटकना नहीं पड़ेगा।
इस व्यवस्था को लागू करने से आयोग लंबित 800 मामलों की त्वरित सुनवाई कर सकेगा। नए मामलों की भी सुनवाई की जा सकेगी। इस नई व्यवस्था के तहत आयोग के सदस्यों को न्यायिक शक्तियां प्रदान की गई हैं, जिससे वे अपने स्तर पर मामलों की सुनवाई और निपटारा कर सकेंगी। यह विकेंद्रीकरण आयोग के कामकाज को गति देगा और पीड़ित महिलाओं को कम समय में तारीखें मिलेंगी। इससे न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी। यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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त्वरित न्याय देने के लिए लिया निर्णय
हिमाचल प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी ने कहा कि सदस्यों को अदालत लगाने की शक्ति देने के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। जुलाई से यह व्यवस्था शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि यह पहल विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होगी जो ग्रामीण या दूरदराज के इलाकों से आती हैं। उन्हें अब न्याय के लिए लंबी यात्राएं नहीं करनी पड़ेंगी।
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