पीड़ित का आरोप है कि उसकी पत्नी और कुछ रिश्तेदारों ने जानबूझकर उसकी बीमारी का खुलासा गांव और आसपास के क्षेत्रों में कर दिया। इस कारण उसे सामाजिक भेदभाव और भारी मानसिक तनाव झेलना पड़ रहा है। पीड़ित के अनुसार, उसे अब समाज में तिरस्कार की दृष्टि से देखा जा रहा है, जिससे उसकी प्रतिष्ठा को गहरा आघात लगा है। पुलिस प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे किसी की निजी स्वास्थ्य जानकारी को सार्वजनिक न करें। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एसपी संदीप धवल ने बताया कि एचआईवी/एड्स एक्ट के तहत पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना कानूनी रूप से जरूरी है। इस कानून का मकसद पीड़ित व्यक्ति को सामाजिक भेदभाव से बचाना और उसे सम्मानजनक जीवन का अधिकार देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति स्वास्थ्य संबंधी ऐसी जानकारी साझा करना कानून का सीधा उल्लंघन है। शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ जारी है। तथ्यों के आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।