रोज की तरह बच्चों को स्कूल से घर ला रहीं तीन महिलाओं में से दो महिलाओं और एक बच्चे को मौत ने घर पहुंचने से पहले झपट लिया। दरअसल गायत्री, पूनम और नर्वदा अपने बच्चे हिम्मत, सचिन और काव्या को आस्था पब्लिक स्कूल से घर ला रही थीं।
दोपहर एक बजे छुट्टी होने पर तीनों अपने बच्चों के साथ स्कूल के पास बस में बैठकर दीदो घाटी पहुंचीं। बस का रास्ता अलग होने की वजह से सभी यहीं उतर गए। और कुछ ही दूरी पर स्थित घरों की तरफ पैदल चलने लगे। लेकिन इसी बीच कार आते देख उन्होंने लिफ्ट ले ली जो इन छह में से तीन की मौत का सबब बन गई।
वेंटिलेटर में काव्या, हालत गंभीर
कार हादसे में घायल पांच वर्षीय काव्या की हालत भी काफी गंभीर है। बच्ची के सिर पर गहरी चोटें हैं। डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर बच्ची को रखा है। अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक अधीक्षक डॉ. रमेश चंद ने बताया कि अस्पताल में उपचाराधीन सभी घायलों के टेस्ट मुफ्त किए गए हैं।
मृतकों का पोस्टमार्टम करवाया गया है। जिला प्रशासन ने मृतकों के पार्थिव शरीर को घर तक पहुंचाने के लिए मृतक वाहन की व्यवस्था की है।
निजी स्कूल में पढ़ने वाले सचिन, काव्या और हिम्मत केजी कक्षा के छात्र है। इनमें से हिम्मत की मौत हो गई है। जबकि काव्या की हालत गंभीर है, और सचिन ठीक है। हाल ही में इन तीनों ने स्कूल में प्रवेश लिया हैं।
बुधवार को कायना के पास बने शेड में सभी लोग बस का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच एक कार चालक देवेंद्र जोकि नर्वदा का काव्या के घर का सदस्य है, गाड़ी लेकर आता है। सभी को गाड़ियों बैठाकर वह कायना शेड से आगे चल पड़ता है। लेकिन एक मोड़ क्रास करके गाड़ी सड़क से बाहर हो जाती है।
कार में सवार सभी लोग हादसे का शिकार हो जाते है। इस हादसे में तीन व्यस्क समेत एक बच्चे की मौत हो जाती है। जबकि दो बच्चे और दो व्यस्क घायल हो जाते है।
स्थानीय निवासी देवेंद्र का कहना है कि वह सभी बनूटी से दीदूघाटी तक आए थे। यहां से काव्या के चाचू देवेंद्र कार लेकर घर की ओर जा रहे थे। कायना के पास उन्हें यह सभी लोग मिले और उन्हें गाड़ी में बैठाकर घर की ओर जाने लग गए। लेकिन चंद मीटर की दूरी पर ही गाड़ी सड़क से बाहर हो गई।
गायत्री अपने पीछे छोड़ गई दो बेटियां और एक बेटा
कार हादसे में गायत्री अपने पीछे दो बेटियां और एक बेटे को दुनियां में छोड़कर विदा हो गई है। जबकि चालक देेवेंद्र की अभी तक शादी ही नहीं हुई थी।
बनूटी-पाहल सड़क की हालत बेहद खस्ता है। यहां सड़क के किनारे अधिकांश जगह पर पैराफिट तक नहीं लगे हैं। कई हादसे इस सड़क पर हो चुके हैं लेकिन लोक निर्माण विभाग की नींद नहीं टूटी। अगर सड़क किनारे क्रैश बैरियर लगे होते तो शायद जानें बच जातीं।
कई बार स्थानीय लोगों ने पैराफिट और क्रैश बैरियर लगाने की मांग की गई लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। ग्राम पंचायत नेरी के पूर्व उपप्रधान राजेंद्र ठाकुर और पूर्व में युवक मंडल के प्रधान भीम सिंह वर्मा ने कहा कि लोक निर्माण विभाग इस ओर ध्यान ही नहीं दे रहा। इस रूट पर एचआरटीसी विभाग की बसों की सुविधा भी कम है।
आईजीएमसी पहुंचे भारद्वाज
शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कायना के पास हुए सड़क हादसे पर शोक जताया है। शिक्षा मंत्री ने आईजीएमसी में भर्ती घायलों का हाल जाना। चिकित्सकों और अधिकारियों को घायलों के उपचार के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए। शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भी कायना के पास हुए सड़क हादसे पर शोक जताया है
मृतकों को 10-10, घायलों को 5-5 हजार
उपमंडलाधिकारी शिमला ग्रामीण अनिल शर्मा ने बताया कि प्रशासन की ओर से मृतकों के परिजनों को दस-दस हजार रुपये और घायलों को पांच-पांच हजार रुपये की फौरी राहत राशि प्रदान की गई है।