रक्षा मंत्रालय की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति पर ऑल इंडिया छावनी परिषद वेलफेयर एसोसिएशन ने सवाल उठाए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सुराना और पैटर्न जनरल मोहन भंडारी, सदस्य मनीष शर्मा और राज कुमार सिंगला ने बताया कि विशेषज्ञ समिति में ब्यूरोक्रेटस व आर्मी के अफसरों को शामिल किया गया है।
जबकि इसमें लोकसभा, राज्यसभा सांसद और छावनी वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी भी शामिल किए जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि 62 छावनी क्षेत्रों को खत्म करने के लिए छावनी के लोगों से ऑनलाइन मतदान करवाया गया।
इसमें 90 प्रतिशत लोगों ने छावनी क्षेत्रों को खत्म करने की हामी भरी है। जबकि 10 प्रतिशत लोगों ने खत्म न करने के लिए अपना मत दिया। छावनी परिषद को खत्म करने से छावनियों में चल रही अंग्रेजी हुकूमत से भी आजादी मिलेगी और नागरिकों को आजादी से जीने का मौका मिलेगा।
छावनी परिषदों का अध्यक्ष ब्रिगेडियर होता है यह पद मनोनीत है वहीं दूसरे भी कई पदों पर मनोनीत सेना के अधिकारियों का ही कब्जा है। जिसके कारण छावनियों में विकास नहीं हो पा रहा है।