इस घटनाक्रम में प्रमोद, राकेश, शेर सिंह, राजू और कुलविंद्र घायल हुए हैं। उद्योगपतियों को हो रहे नुकसान के चलते आपरेटरों ने हड़ताल वापस ले ली। लेकिन अलग जगह से यूनियन चलाने की वजह से दोबारा विवाद खड़ा हो गया।
उद्योगपतियों को इस हिंसा से अब तक करीब 80 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। परवाणू में इस पूरे प्रकरण को लेकर अब लोग धारा 144 लगाने की मांग करने लगे हैं। घटना के बाद प्रशासन पूरी तरह बेबस नजर आ रहा है।
सोमवार से यहां हालत बेकाबू है लेकिन प्रशासन न े धारा 144 तक यहां नहीं लगाईं है। इसके अलावा लाइसेंसी हथियार जमा करवाने की प्रक्रिया भी शुरू नहीं की है। माहौल ठीक होने के बजाय बिगड़ता जा रहा है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं।
सहायक आयुक्त एसपी जसवाल ने कहा कि धारा 144 लगाना उच्च अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में है। वहां से जो भी आदेश आएंगे उन्हें लागू कर दिया जाएगा। एसएचओ वीरेंद्र चौहान ने कहा कि मारपीट और गाड़ियां रोककर तोड़ने की घटनाओं की जांच जारी है।
इस बारे छानबीन करके कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। डीसी विनोद कुमार ने कहा कि परवाणू औद्योगिक कस्बा है जहां धारा 144 लगाना आसान नहीं है। हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया है जो पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल परवाणू में धारा 144 की जरूरत नहीं है। धारा लगाए जाने से आम लोगों की परेशानी और अधिक बढ़ जाएगी। प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग को मामला नियंत्रित करने के आदेश जारी किए हैं।