यह कोशिकाएं स्वयं ही निष्क्रिय होकर रोग के विकास को रोकने में सहायक होंगी। यह खोज येल यूनिवर्सिटी न्यू हैवन अमेरिका एवं सूक्ष्म जीव प्रौद्योगिकी संस्थान चंडीगढ़ की सहभागिता से की गई है।
इसमें हीरानगर, हमीरपुर के भारतीय युवा अनुसंधानकर्ता डॉ. औरोविंद विद्यार्थी एवं उनके सहयोगी दल ने सूक्ष्म जीव प्रौद्योगिक संस्थान चंडीगढ़ के प्रो. जावेद आगरेवाला, पीजीआई चंडीगढ़ के प्रो. मनोज तिवारी और येल विश्वविद्यालय यूएसए के औषधि विभाग के डा. ऑस्कर, आर कोलगियो के मार्गदर्शन में यह खोज की। उनका दावा है कि निकट भविष्य में कैंसर रोग की रोकथाम में यह खोज मानवता के लिए एक वरदान सिद्ध हो सकती है।