प्रदेश में सत्तासीन भाजपा की सरकार युवाओं से रूसा सेमेस्टर सिस्टम में बदलाव लाने के अपने वायदे को पूरा करने जा रही है। सेमेस्टर सिस्टम को ईयर में बदलने की तैयारी है। रूसा पुनर्विचार कमेटी जल्द सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
इस पर अंतिम फैसला सरकार ही लेगी। फैसला लेने से पहले सरकार को सेमेस्टर से ईयर सिस्टम शुरू करने की चुनौतियां जांचनी होंगी, ताकि पिछली सरकार के दौरान आई समस्याएं न खड़ी हो जाएं।
दरअसल, पूर्ववर्ती सरकार के दौरान रूसा सेमेस्टर सिस्टम लागू करते समय कई खामियां रह गई थीं। प्रदेश के लाखों छात्रों को पांच साल तक इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था। यही वजह थी कि शिक्षा विभाग और विवि को कई बार रूसा सेमेस्टर सिस्टम में बदलाव लाने पड़े।
सेमेस्टर को ईयर सिस्टम में बदलते समय सरकार को सिलेबस बदलाव, मूल्यांकन की प्रक्रिया क्रेडिट, ग्रेड में रहेगी या पुराने ईयर सिस्टम की तरह सीधे सौ अंक की परीक्षा में से मूल्यांकन होगा जैसे बिंदुओं पर गौर करना होगा। 2013 में पूर्व कांग्रेस सरकार ने भी रूसा के तहत सीबीसीएस (च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) को यूजी में लागू किया।
कॉलेजों में इसके लिए न पर्याप्त शिक्षक थे, न कक्षाएं बिठाने को क्लास रूम और न ही नए सिस्टम को लागू करवाने को गैर शिक्षक स्टाफ। नए सिस्टम को समझने में शिक्षकों तक को समय लग गया। यही नहीं, रूसा के सीबीसीएस सिस्टम के तहत चुने जाने वाले विषयों की च्वायस को भी कम किया गया। इसी तरह बार-बार मूल्यांकन की प्रक्रिया बदली, फिर परीक्षा परिणाम आने में ही पांच से आठ माह का समय लगा।
कैसे संचालित होंगी बहु प्रणाली की परीक्षाएं- सरकार यदि यूजी में फिर से ईयर सिस्टम लाती है तो विवि को यूजी की ही परीक्षाओं को चार-चार प्रणाली के तहत करवाना पड़ेगा। इनमें 2015 से पहले के छात्रों की ईयर सिस्टम की परीक्षाएं 2020 तक करवाई जानी हैं। 2015 में लागू रूसा सीबीसीएस (पुराने रूसा) के तहत भी परीक्षा होगी।
बीते सत्र में यूजीसी के मानकों के तहत लागू नए रूसा के तहत भी परीक्षाएं जारी रहेंगी। उस पर ईयर सिस्टम लागू होने पर नए ईयर सिस्टम की परीक्षाएं भी करवानी होंगी। इससे विवि की परेशानियां बढ़ेंगी। नतीजतन, सेमेस्टर सिस्टम के परिणाम आने में पांच माह के बजाय ज्यादा समय लग सकता है।