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एचपीयू में खुलेंगे नौकरियों के द्वार, भरे जाएंगे इतने पद

Sat, 19 Jan 2019 01:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल विश्वविद्यालय की वित्त समिति की कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में गैर शिक्षकों से जुड़े अधिकतर मामलों को मंजूरी मिल गई। छात्रों से संबंधित मामलों को भी वित्त समिति ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसमें यूआईआईटी में तीन नए बी टेक कोर्स स्वयं वित्त पोषित योजना से शुरू करने और गाइडेंस एंड प्लेसमेंट सेल खोलने को भी मंजूरी दे दी है। 

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वित्त समिति से मंजूर यह सभी मामले अब विवि की कार्यकारी परिषद के पास अंतिम मंजूरी के लिए जाएंगे। परिषद की बैठक 22 जनवरी को होगी। वित्त समिति के इन फैसलों से विवि के गैर शिक्षक वर्ग को बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को हुई समिति की बैठक में मुख्य रूप से स्वीकृति मामलों में विवि में स्वयं वित्त योजना के तहत चल रहे कोर्स में सेवारत 80 कर्मचारियों को मुख्य धारा में लाने और इन्हें नियमित करने का बड़ा फैसला लिया गया।

एचपीयू को विभिन्न एजेंसियों से स्वीकृत बजट से होने वाले कार्यों के समय से प्लान और ड्राइंग तैयार करने का काम सरकारी विभागों और निजी ऐजेंसियों को आउटसोर्स करने को भी मंजूरी दी है। वित्त समिति ने बैठक और ईसी से मंजूर तथा वर्तमान में रिक्त पड़े शिक्षकों और गैर शिक्षकों के पदों को विवि को अपने स्तर पर भरे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूर कर लिया है।
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इसमें पिछली और इस वित्त समिति की बैठक से मंजूर 103 सहायक आचार्य और 85 गैर शिक्षकों के पदों को भरा जाना है। शिक्षकों के रिक्त पद को भरने का मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में है। यहां से फैसला आने के बाद इन पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू हो पाएगी। लेकिन गैर शिक्षकों के पदों पर जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

वित्त कमेटी ने छात्रावासों में कुक के आठ पदों को भरने की भी मंजूरी दी है। इसके लिए आवश्यक पात्रता पूरी करने वाले मेस हेल्पर को प्रमोशन का लाभ मिल सकता है। बैठक में प्रति कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान, विधायक  सुभाष ठाकुर, अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल खाची, प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत, विवि के कुलसचिव  घनश्याम चंद, प्रो. नैन सिंह विवि के वित्त अधिकारी नरेंद्र ठाकुर मौजूद रहे।

बैठक में लिए अन्य अहम फैसले 
बैठक में लिए अहम फैसलों में स्वास्थ्य केंद्र में दंत चिकित्सक का एक पद सृजित करने, एक पद कनिष्ठ अभियंता मैकेनिक्स (ऑटो) का भरने, स्टूडेंट पेड मेस हेल्पर को दैनिक भोगी बनाने, सेवारत चार कैलियोग्राफिस्ट को नियमित करने, ट्रांसपोर्ट अधिकारी किशोरी लाल शर्मा को अधिशासी अभियंता के पद पर पदोन्नत करने, महिला अध्ययन केंद्र में दो महिला शोध कर्ताओं की सेवाएं नियमित करने, पत्रकारिता एवं जन संचार विभाग में तीन सहायक आचार्य के पद भरने को स्वीकृति प्रदान करने और शिक्षकों का मानदेय दो हजार करने का फैसला लिया गया।

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वित्त समिति की बैठक में विवि के यूआईआईटी (यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इनर्फोमेशन एंड टेक्नोलॉजी) में तीन नए कोर्स बीटेक सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्यूनिकेशन कोर्स को स्वयं वित्त पोषित योजना से शुरू करने को स्वीकृति प्रदान की। इसके लिए विवि को फीस से ही संसाधन जुटाने होंगे। इन कोर्स को चलाने के लिए 30 शिक्षकों के पद भरने की भी मंजूरी दी गई है।

विवि के व्यावसायिक एवं यूजी पीजी डिग्री कोर्स के छात्र-छात्राओं को रोजगार पाने में सहयोग करने के लिए विवि में अलग से स्टूडेंट प्लेसमेंट एंड गाइडेंस सेल खोलने के प्रस्ताव को मंजूर किया है। यह सेल प्रदेश सरकार के उद्योग और शिक्षा सहित अन्य विभागों के साथ मिलकर छात्रों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए कार्य करेगा। 

प्लेसमेंट सेल शुरू होने से हजारों छात्रों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यही नहीं एचपीयू में प्रोफेशनल कोर्स कर रहे सैकड़ों छात्रों को भी नौकरी पाने का यह एक बेहतर विकल्प साबित होगा। विवि प्रशासन पहले से ही व्यावसायिक कोर्सों को और आधुनिक करने तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार करने को प्राथमिकता दे रहा है। ऐसे वित्त कमेटी की बैठक में प्लेसमेंट सेल खोलने को दी गई स्वीकृति इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। प्लेसमेंट सेल खुलने के बाद कई बड़ी कंपनियां एचपीयू में साक्षात्कार आयोजित कर छात्रों को नौकरी के अवसर मुहैया करवा सकती हैं। 

यह प्रस्ताव नहीं हुए मंजूर
विवि की वित्त समिति की बैठक के एजेंडे में शामिल अतिरिक्त वित्त अधिकारी और संयुक्त कुलसचिव के पद को सृजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। विवि के अनुभाग अधिकारी और सहायक कुलसचिव की वेतन विसंगतियों के मामले पर चरचा हुई लेकिन वित्त समिति ने एक्सपर्ट कमेटी बनाकर उसकी सिफारिशों के आधार पर फैसला लेने का निर्णय दिया।

विवि के कानूनी और सूचना का अधिकार के तहत आने वाले मामलों का निपटारा करने को अलग से विधि प्रकोष्ठ गठन के प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी गई। इसके अलावा वित्त समिति ने विवि के पेंशन भोगियों के मामलों को निपटाने को अलग से जीपीएफ एवं पेंशन सेल न बनाकर पहले से चल रहे पेंशन सेल की सेवाओं में सुधार करने को कहा है।
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