कैग रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रदेश के कंदरोड़ी और पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र के कामों में विलंब हुआ है। दोनों परियोजनाओं के कार्यों को 55 उप कार्यों में विभाजित किया था। बीस कार्यों पर 103.40 करोड़ खर्च किए गए पर ये अधूरे रहे। ये दोनों परियोजनाएं एक साल बाद भी पूरी नहीं हो पाईं। कंपनी ने तकनीकी स्वीकृति के बिना ही कार्य शुरू दिया जबकि कंपनी का वित्तीय प्रबंधन भी दक्ष और प्रभावी नहीं था।
कैग रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि शहरी, ग्रामीण और भौगोलिक रूप से अलग-थलग पड़े क्षेत्रों में औद्योगिकीकरण और रोजगार पैदा करने के लिए कंदरोड़ी और पंडोगा औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंदरोड़ी परियोजना में कार्य जनवरी 2016 से अक्तूबर 2017 के दौरान सौंपे थे। परियोजना स्वीकृत होने की तिथि से 10 से 31 माह के विलंब के बाद ये सौंपे गए।
इसके अलावा पांच कार्य निर्धारित तिथि के बाद पूरे किए गए। पंडोगा परियोजना में कार्य स्थल विकास कार्यों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। इसे विस्तृत परियोजना रिपोर्ट कार्यों के क्रियान्वयन प्रारंभ करने के पूर्व किया जा सकता था। कंपनी ने कार्यों को प्रारंभ करने में विलंब किया और कार्य 25.44 करोड़ की लागत से दिसंबर, 2017 में पूरा हुआ।
दोनों औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए परामर्श शुल्क का अधिक भुगतान किया है। कुल लागत का 2.30 फीसदी परामर्श शुल्क देना था तथा उस पर सेवाकर लगाते हुए सितंबर 2015 में नियुक्त किया। परियोजना की आरंभ में वास्तविक लागत तय नहीं थी। पहली किस्त अनुमानित लागत के आधार पर चुकाई गई।
कंपनी ने कंदरोड़ी और पंडोगा में 27.06 करोड़ लागत थी जबकि अनुमानित लागत 54.98 करोड़ लगाई और 24.34 करोड़ वास्तविक लागत अनुमानित लागत 45.81 करोड़ में परामर्श शुल्क सौंपा। सितंबर 2015 में 1.04 करोड़ और जून 2017 में 15.12 लाख का नुकसान हुआ है। कंदरोड़ी में जल एवं सीवरेज तथा स्ट्रीट लाइट कार्यों के परामर्श की गणना से बाहर रखा गया।
इस तरह से 5.72 करोड़ के सौंपे गए कार्यों को पंडोगा में शामिल किया गया जोकि 12.92 लाख के परामर्श शुल्क और उस पर 1.94 लाख की लागत से पूरा हुआ। घटिया कार्यों के कारण, तारकोल बिछाने का कार्य को दूसरे ठेकेदार के माध्यम से कराना पड़ा। ठेके दार को 5.74 लाख का अतिरिक्त भुगतान किया।