राष्ट्रीय राजमार्गों पर दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को उठाने के लिए खरीदी गई एक करोड़ कीमत की चार क्रेन सफेद हाथी साबित हो रही हैं। सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस विभाग ने नियमों और भारत सरकार के आदेशों को दरकिनार कर एक करोड़ की ऐसी क्रेन खरीद ली, जो पहाड़ी क्षेत्र में काम करने लायक ही नहीं थी।
यही नहीं, इन क्रेनों को चलाने के लिए जरूरी स्टाफ को ट्रेनिंग तक नहीं दी गई। नतीजतन, सरकार का करीब एक करोड़ रुपये बर्बाद हो गया। राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना राहत सेवा स्कीम के तहत साल 2010 में चार भारी क्रेनों की खरीद की गईं। सीएजी रिपोर्ट के अनुसार इन क्रेनों को चार जिलों में आवंटित किया गया, लेकिन मंडी को छोड़कर किसी भी अन्य जगह इनका संचालन नहीं हो सका।
ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि विभाग ने क्रेन खरीद के समय आपूर्तिकर्ता द्वारा इसके कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का प्रावधान ही नहीं किया। यह क्रेनें सिर्फ शोपीस बनकर रह गईं। रिपोर्ट के अनुसार खरीद के दौरान केंद्र सरकार के मानकों को दरकिनार किया गया। ऐसी क्रेन खरीदी गईं, जो सिर्फ 500 किलोग्राम वजह ही उठा सकती थीं।
इसके चलते दुर्घटना के समय इन क्रेनों की मदद से वाहन को हटाया ही नहीं जा सका। ऐसे में तकनीकी व प्रशिक्षण की कमी के चलते इनकी खरीद पर खर्च हुए करीब एक करोड़ रुपये बर्बाद हो गए। खास बात यह है कि सीएजी ने इस संबंध में सरकार को रिपोर्ट भेजी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उस रिपोर्ट पर कोई संज्ञान ही नहीं लिया।