भवन मालिकों को आठ ही यूनिट मिलेंगे, जबकि बिल्डरों को इससे ज्यादा भी यूनिट दिए जाने का प्रावधान किया गया है। इन यूनिटों में रहने वाले लोगों को बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना बिल्डर का जिम्मा होगा।
15 साल के लिए बनेगी कमेटी
चयन समिति 15 साल के लिए बनेगी। इसके बाद कमेटी को नए सिरे से भी बनाया जा सकता है। शिक्षण संस्थान इसके दायर में नहीं आएंगे।
बेचने नहीं, खरीदने वालों पर पड़ेगी मार
हिमाचल में अगर कोई 2500 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा जमीन बेचता है तो बेचने वालों पर नहीं, बल्कि रजिस्ट्रेशन फीस खरीदने वालों से वसूली जाएगी।