लोकसभा चुनाव में मिली हार को स्वीकार करते हुए हिमाचल मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में आस्था जताई है। शनिवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने लोकसभा चुनाव परिणाम पर प्रस्ताव पारित कर जनता के फैसले को विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया।
मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में विश्वास व्यक्त किया। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह इस बैठक में नहीं थे। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से मुख्यमंत्री से अवकाश लिया था। मंत्रिमंडल ने यह प्रस्ताव भी पारित किया कि राज्य सरकार दृढ़ता और मजबूती के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के साथ खड़ी है।
प्रस्ताव में कहा गया है कि राज्य सरकार देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे को और मजबूती प्रदान करने के लिए राज्य सरकार अपनी जनकल्याणकारी नीतियों एवं कार्यक्रमों को और प्रभावशाली तरीके व उत्साह के साथ जारी रखेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये टैंपरेरी फेज है।
हिमाचल में कांग्रेस को पांच साल के लिए जनादेश मिला है और हम पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए सरकार नए सिरे से शुरुआत करेगी।
इस बैठक के बाद राज्य में बड़े स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल की चर्चा भी शुरू हो गई है। ये बदलाव जिलों से लेकर सचिवालय स्तर तक होगा।
सरकार में यह चिंतन भी शुरू हो गया है कि सीएम आफिस में रिटायर अफसरों पर उठते सवालों और फील्ड में सरकारी योजनाओं की डिलीवरी में कमी को दूर किया जाए।