जो जीता वही सिकंदर... लेकिन उपचुनाव में किंगमेकर ही सिकंदर कहलाएगा। पच्छाद हलके में टिकट की दौड़ में भले ही दर्जनों नेता खड़े हैं, लेकिन असली मुकाबला अपने चहेते को टिकट दिलाने वाले नेताओं में माना जा रहा है। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर हो या फिर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल। वीरभद्र सिंह हो या प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर। टिकट झटकने को बेताब चाहवानों ने ऐसे बड़े नेताओं का सहारा लेना शुरू कर दिया है।
हालांकि, पच्छाद हलके में टिकट के दावेदार सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में डटे हुए हैं, लेकिन अंदरखाते सभी शिमला से दिल्ली तक संपर्क बनाने में जुटे हैं। स्थानीय स्तर के बड़े नेताओं की भूमिका भी इसमें अहम मानी जा रही है। खासकर भाजपा में विधायक से सांसद बने सुरेश कश्यप की पसंद भी टिकट आवंटन में अहम भूमिका निभा सकती है।
पच्छाद उपचुनाव का बिगुल बज गया है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है। अभी तक किसी भी दल ने प्रत्याशियों के नामों पर मुहर नहीं लगाई है। पार्टी हाईकमान के आदेशों का इंतजार कर रहे चाहवान अंदरखाते गोटियां फिट करने में जुट गए हैं। चहेते को टिकट दिलाने के लिए बड़े नेता भी पर्दे के पीछे टिकट झटकने की जुगत में हैं।
हालांकि, कांग्रेस पार्टी में टिकट की दौड़ में महज तीन नाम ही सामने आ रहे हैं, लेकिन स्थानीय कार्यकर्ताओं की ओर से मुसाफिर के नाम का प्रस्ताव रखने से उनके मैदान में फिर उतरने की संभावना प्रबल हो गई है। रतन कश्यप और दिनेश आर्य भी टिकट की दौड़ में मुसाफिर को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। उधर, भाजपा में एक अनार सौ बीमार वाली कहावत फिट बैठ रही है।
भाजपा में जिला परिषद सदस्य दयाल प्यारी, रीना कश्यप, आशीष सिक्टा, प्रेम कश्यप, हीरापाल सिंह, सुनील डोगरा, सुखपाल, अजय कुमार, सुरेंद्र चौहान, बलदेव कश्यप आदि के नाम सुर्खियों में चल रहे हैं।