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धर्मशाला उपचुनाव में जातीय कार्ड से तिकोना मुकाबला होने के आसार

Fri, 11 Oct 2019 02:20 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (फाइल फोटो)
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भाजपा और कांग्रेस दोनों ओर से गद्दी उम्मीदवार देने के बाद पनपे जातीय ध्रुवीकरण ने धर्मशाला में तिकोने मुकाबले के आसार बना दिए हैं। पिछले दो दिन में जातीय ध्रुवीकरण की तथाकथित हवा तेजी से बढ़ी है। खासकर निर्दलीय उम्मीदवार की ओर से ओबीसी वोट बैंक में सेंध का डर दोनों दलों को सता रहा है। इसी बीच राजपूत और ब्राह्मण सहित अन्य जातियों के वोट बैंक की चुप्पी ने राजनीतिक दलों को और ज्यादा डरा दिया है। 

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फिलहाल बने नए सियासी समीकरणों से डरी कांग्रेस और भाजपा ने ओबीसी के साथ राजपूत, ब्राह्मण और गोरखा वोट बैंक को साधने के लिए फील्डिंग सजा दी है। राजपूत वोट बैंक को साधने के लिए कांग्रेस ने आशा कुमारी और राजेंद्र राणा को फील्डिंग पर लगाया है। ब्राह्मणों के लिए मुकेश अग्निहोत्री और सुधीर शर्मा की जोड़ी को उतारने की तैयारी है।

भाजपा ने भी इसी तर्ज पर राजपूत कार्ड को साधने के लिए सीएम जयराम ठाकुर और प्रेम कुमार धूमल के धर्मशाला में दौरे तय कर दिए हैं। ब्राह्मण वोट बैंक को साधने के लिए शांता कुमार का विस्तृत दौरा तैयार किया जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि जातीय ध्रुवीकरण की काट के लिए भाजपा और कांग्रेस का प्लान सही बैठता है या नहीं। 
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इसलिए बन रहे तिकोने मुकाबले के आसार
धर्मशाला विस क्षेत्र में गद्दी समुदाय का 15, ओबीसी करीब 25 और शेष वोट प्रतिशत राजपूत-ब्राह्मण और अन्य जातियों से है। भाजपा और कांग्रेस ने इस बार एक ही समुदाय से दोनों नए चेहरे दिए हैं। भाजपा प्रत्याशी धर्मशाला में सांगठनिक मजबूती और मोदी मैजिक के सहारे जीत की तलाश में हैं।

लेकिन, किशन कपूर की खामोशी और ओबीसी-राजपूत-ब्राह्मण वोट बैंक के ध्रुवीकरण का डर सता रहा है। कांग्रेस कमजोर संगठन के बीच एकजुटता की कोशिश और दो साल में धर्मशाला में विकास न होने की दुहाई देकर जीत तलाश रही है।

सुधीर शर्मा की खामोशी और जातीय ध्रुवीकरण परेशानी बनी हुई है। निर्दलीय ओबीसी उम्मीदवार राकेश चौधरी प्रचार में ज्यादातर अपने समुदाय को एकजुट होने की दुहाई दे रहे हैं। राकेश ओबीसी के सहारे ही जीत की तलाश में हैं। तीनों उम्मीदवारों के इन जमीनी समीकरणों ने मुकाबला तिकोना बना दिया है।

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