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प्रदेश सरकार के गले की फांस न बन जाए बस किराया वृद्धि

Sat, 15 Sep 2018 11:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल में निजी ऑपरेटरों के दबाव पर सरकार ने बस किराया बढ़ोतरी की तैयारी तो कर ली है, लेकिन यह गले का फांस बनती जा रही है। 24 सितंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस पर मुहर लगेगी। निजी बस ऑपरेटर न्यूनतम किराया 7 रुपये से ज्यादा चाहते हैं, जबकि जनता इसके पक्ष में नहीं है। ऐसे में सरकार को आक्रोश झेलना पड़ेगा। 

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परिवहन विभाग ने उत्तराखंड की तर्ज पर किराया बढ़ाने का ड्राफ्ट तैयार किया है। अब कैबिनेट से इसे मंजूरी मिलना बाकी है।  मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने निजी बस ऑपरेटरों को किराया बढ़ाने का आश्वासन दिया है। इनके आश्वासन के बाद ही ऑपरेटरों ने हिमाचल में हड़ताल खत्म की थी, लेकिन प्रदेश की जनता नहीं चाहती कि बस भाड़े में बढ़ोतरी हो।

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बस किराया बढ़ाया तो सड़कों पर उतरेगी इंटक

सरकार न्यूनतम भाड़े को 3 से बढ़ाकर 5 रुपये करना चाह रही है। इस किराये में पहाड़ी क्षेत्रों में 30 पैसे जबकि मैदानी में 19 पैसे की बढ़ोतरी होगी, लेकिन जनता इस वृद्धि को लेकर भी मुखर विरोध कर रही है। परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने कहा कि किराया बढ़ोतरी का मामला कैबिनेट में जा रहा है। कितना किराया बढ़ाना है, कैबिनेट में तय होगा। 

इंटक के प्रदेशाध्यक्ष बबलू पंडित ने कहा है कि किराया बढ़ाया तो इंटक सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरेगी। पंडित ने कहा निजी बस ऑपरेटरों के दबाव पर बस किराया बढ़ने से कामगार, कर्मचारी और आम वर्ग पर वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिसे इंटक सहन नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि मजदूर, कर्मचारी, निजी और सरकारी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी रोजाना निजी बसों में सफर करते हैं। किराया बढ़ने पर इसी वर्ग पर सीधा मार पड़ेगी।
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