राज्य सचिवालय में भी इस विषय पर गंभीर मंथन हो रहा है। प्रदेश सरकार पर बढ़ते कर्ज, केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाओं के वित्तपोषण में सीलिंग लगाने और विकास योजनाओं के लिए बजट की कमी के बीच अफसरशाही ने भविष्य के संकट से उबरने के लिए यह सुझाव दिया है। सूत्रों के अनुसार शीर्ष अधिकारी मुख्यमंत्री से इस विषय को लगातार उठा रहे हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ठीक करने के लिए कुछ कड़े फैसले लेने की सलाह दी है। अधिकारियों का यह भी तर्क है कि केंद्र ने ओपीएस को लागू करने की हलचल के बीच ही कई तरह की पाबंदियां लगा दी हैं। एनपीएस कर्मचारियों के करीब 9,000 करोड़ रुपये केंद्र के पास फंसे हैं। आपदा से भी हिमाचल प्रदेश में बहुत नुकसान हुआ है। इसकी भरपाई के लिए केंद्र से 10 हजार करोड़ रुपये मांगे गए थे, जो नहीं मिले हैं।