प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में पेश हुए पहले आम बजट में उद्योग जगत के हाथ निराशा लगी है। मध्यम सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों (एमएसएमई) को कोई राहत नहीं मिली है। इससे उद्योगपतियों में मायूसी छा गई है। उद्योगपतियों का कहना है कि यह बजट सामान्य बजट है, लेकिन इसमें उद्योगों को कोई राहत नहीं मिली है।
जिस प्रकार छोटी दुकानों के लिए पेंशन जैसी व्यवस्था की गई है, उसी प्रकार छोटे उद्योगों के लिए भी ऐसी कोई व्यवस्था होनी चाहिए थी। बजट में ऐसा कुछ नहीं हुआ है। बीबीएन उद्योग संघ के अध्यक्ष शैलेश अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार के आम बजट में उद्योग जगत के लिए कोई लाभ नहीं मिला है।
खासतौर पर मध्यम सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को कोई खास सौगात नहीं मिली है। छोटे उद्योगों के लिए भी कोई विशेष योजना नहीं मिली है। हालांकि, श्रम कानूनों में थोड़ा बहुत संशोधन किया गया है, लेकिन उसकी अधिसूचना आने के बाद ही पता चल पाएगा कि श्रम कानून में क्या सुविधा मुहैया करवाई गई है।
आम लोगों के हित में है बजट : हरीश अग्रवाल
सीआईआई के चेयरमैन हरीश अग्रवाल ने बजट को आम लोगों के हित में बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से एक ट्रिलियन डॉलर के टर्नओवर से निश्चित रूप से निवेश बढ़ेगा। नई योजनाएं आएंगी।
नए छोटे बिजनेसमैन को अपना सेटअप करने पर विशेष बल दिया है। लोअर और मिडल क्लास के लोगों के लिए बजट में कई प्रावधान कर राहत दी गई है। बजट में उद्योगों के लिए कोई खास सौगात नहीं मिली है।