सीमा सुरक्षा बल पश्चिमी कमान के एडीजी कमल नयन चौबे ने कहा कि बीएसएफ भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा पर पहली पंक्ति में आतंकियों से लोहा ले रही है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी बीएसएफ देश की उम्मीदों पर खरी उतरी है। बीएसएफ को 2000 से ज्यादा अलंकरण प्राप्त हुए हैं।
1800 बहादुर सैनिकों ने देश के लिए प्राणों की बाजी लगाई है। कई जवानों ने अपने अंग भी गंवाएं हैं। ऐसे जवानों की बीएसएफ हर संभव मदद कर रही है। बीएसएफ ने छावला नई दिल्ली में ‘दिव्यांग स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ भी स्थापित किया है।
जो दिव्यांग कर्मियों को बीएसएफ में सेवा काल के दौरान और सेवानिवृत्त के बाद कौशल विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यहां पैरा स्पोर्ट्स ट्रेनिंग, कंप्यूटर स्किल डेवलपमेंट कोर्स और कम्युनिकेशन स्किल डेवलपमेंट कोर्स करवाए जा रहे हैं।
रैली शिमला से शुरू होकर 5 अगस्त को नारकंडा, 6 अगस्त को रामपुर, 7 अगस्त को कल्पा, 8 अगस्त को पूह, 9 अगस्त को नाको, 10 अगस्त को ताबो, 11 अगस्त को काजा, 12 अगस्त को लोसर, 13 अगस्त को छात्रु, 14 अगस्त को पालछन और 15 अगस्त को रोहतांग होते हुए मनाली पहुंचेगी।
दिव्यांगों को खेलों के लिए प्रेरित करना आदित्य का लक्ष्य
साइकिल रैली के आयोजक आदित्य मेहता ने बताया कि हमारे जो जवान सीमाओं पर हादसों में शरीर के अंग गवां चुके हैं, उन्हें खेलों की तरफ प्रेरित करना ही उनकी संस्था का मकसद है। आदित्य ने बताया कि खुद भी दिव्यांग हैं। इसके बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और साइक्लिंग में कई रिकॉर्ड बनाए हैं। वह अपना रिकॉर्ड लिम्का बुक में भी दर्ज करा चुके हैं।
हरिंद्र देश को दो बार दिला चुके हैं कांस्य पदक
2012 में जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में हुए माइन ब्लास्ट में कोटला काजियां (अमृतसर) के रहने वाले जवान हरिंद्र सिंह को अपनी सीधी टांग गंवानी पड़ी। हरिंद्र ने बताया की दुर्घटना के बाद आदित्य मेहता फाउंडेशन ने उन्हें हैदराबाद में प्रोफेशनल ट्रेनिंग करवाई। 2017 और 2018 में हुई एशियन पैरा साइक्लिंग चैंपियनशिप में हरिंद्र ने देश का प्रतिनिधित्व कर कांस्य पदक जीता।
‘आई एम लिविंग विद साइक्लिंग’: गीता
गंभीर बीमारी से आठ सालों तक जूझने के बाद अहमदाबाद की गीता एस राव ने 8 सितंबर 2017 को फ्रांस में आयोजित सुपर रैंडोनियोर खिताब जीता। यह खिताब जीतने वाली गीता देश की पहली महिला बनीं। इस खिताब के लिए गीता ने 41 दिनों में साइक्लिंग कर 1500 किलोमीटर के चार पड़ाव पूरे किए। गीता का कहना है ‘आई एम लिविंग विद साइक्लिंग’
21 साल के हरजीत की यह चौथी इनफिनिटी राइड
पुणे निवासी 21 साल के हरजीत राकेश मुंद्रा इनफिनिटी राइड में भाग लेने वाले सबसे कम उम्र के प्रतिभागी हैं। 17 साल की उम्र में सड़क दुर्घटना में अपनी एक टांग गवां चुके हरजीत 2015 में बंगलूरू से हैदराबाद, 2016 में मनाली से खारदुंगला पास, 2017 में हैदराबाद से त्रिपुति राइड में भाग ले चुके हैं। हरजीत का कहना है कि साइक्लिंग ने उन्हें जीने की नई दिशा दिखाई है।