चीन अधिकृत तिब्बत बार्डर से सटी सामरिक महत्व की पांच सड़कों पर वन विभाग ने अड़ंगा लगा दिया है। फोरेस्ट क्लीयरेंस न मिल पाने से इनका विस्तारीकरण अटक गया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने सड़कों की क्लीयरेंस का मामला प्रदेश सरकार के समक्ष उठाया है, लेकिन अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिल पाई है।
पांच छोटी-बड़ी सड़कों में 20 से 30 किलोमीटर के पैच हैं, जिनको बीआरओ दुरुस्त करना चाहता है। इन सड़कों से सेना का रसद और खाद्य सामग्री तिब्बत बार्डर तक पहुंचाई जाती है। मनाली से सरचू, पवारी से पूह, संसारी से थांडी, समदो से काजा और दारचा से शिंकुला मार्ग के 20 से 30 किलोमीटर के पैच को चौड़ा करने में वन विभाग की जमीन आड़े आ रही है।
इन पैच को छोड़कर अन्य मार्ग पर बीआरओ ने चौड़ा कर दिया है। बीआरओ का कहना है कि अगर समय रहते क्लीयरेंस मिलती है तो सड़कों के काम में तेजी लाई जा सकती है। सड़कों को चौड़ा करने से जहां सेना को फायदा होगा, वहीं क्षेत्र के लोग भी लाभान्वित होंगे।
बीआरओ बार्डर तक सड़कें पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। बार्डर तक क्लास-9 सड़क पहुंचा दी गई है। सड़कों के कुछ पैच में वन विभाग की जमीन हैं, अगर फोरेस्ट क्लीयरेंस जल्द हो तो बीआरओ सड़क विस्तारीकरण जल्द पूरा कर देगा।
-ब्रिगेडियर एसके कटारिया, चीफ इंजीनियर, बीआरओ
बार्डर रोड वन विभाग की प्राथमिकता में हैं। दारचा से शिंकुला सड़क का मामला वन मंत्रालय के पास है, इसे क्लीयरेंस मिल चुकी है। बीआरओ ने पैसा पुराने अकाउंट में जमा करवा दिया है। समदो मार्ग का पैच सेंक्चुरी एरिया में आता है। ये मामला केंद्र सरकार को भेजा गया है जो फाइनल स्टेज पर है।
-डॉ. बीआरआर सिंह, अतिरिक्त पीसीसीएफ, हिमाचल