मनाली के बाहंग के समीप बनी थ्री लेयर सुरक्षा दीवार। इससे बाढ़ से सड़क को नुकसान नहीं पहुंच पाया।
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सरेही नाला में बादल फटने के बाद आई बाढ़ से बंद हुआ मनाली-लेह नेशनल हाईवे सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने रिकॉर्ड समय में बहाल किया। महज 10 घंटे में युद्धस्तर पर कार्य करते हुए वाहनों की आवाजाही शुरू की गई। इसमें सीमा सड़क संगठन 70 आरसीसी की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वीरवार मध्यरात्रि के बाद ही मनाली-लेह मार्ग पर वाहनों की आवाजाही थम गई थी। पलचान पुल के समीप बाढ़ के साथ आया मलबा एकत्रित हो गया था। बड़ी-बड़ी चट्टानें पुल के पास पहुंचने से एक दिन में सड़क बहाल होने की उम्मीद न के बराबर थी। अटल टनल की ओर स्नो गैलरी में मलबा भरने से सीमा सड़क संगठन योजक परियोजना की टीम भी पलचान तक नहीं पहुंच पाई। योजक परियोजना ने स्नो गैलरी से मलबा हटाया। दूसरी ओर अपना कार्यक्षेत्र नहीं होने के बावजूद 70 आरसीसी दीपक परियोजना ने सड़क बहाली का जिम्मा उठाया।
पलचान की ओर से मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर चला। इसके लिए दो जेसीबी, एक छोटी जेसीबी काम पर लगाई गईं। वीरवार सुबह लगभग 9:00 बजे सड़क बहाल करने का कार्य शुरू हुआ था। वीरवार शाम लगभग 7:00 बजे वाहनों की आवाजाही शुरू कर दी गई। इसके अलावा बाहंग इलाके में भी सीमा सड़क संगठन की थ्री लेयर प्रणाली कामयाब रही। इस प्रणाली से सड़क को नुकसान नहीं पहुंच पाया। सड़क को नदी के वेग से बचाने के लिए सीमा सड़क संगठन ने कंकरीट, बोल्डर और क्रेटवाल की थ्रीलेयर दीवारें बनाई हैं, इससे सड़क तक बाढ़ का पानी नहीं पहुंचा।
सीमा सड़क संगठन 70 आरसीसी के अधिकारी ने कहा कि उनके अधीन पलचान से रोहतांग की ओर जाने वाली सड़क है। टीम ने पलचान की ओर सड़क बहाल करने का कार्य भी किया। दोनों ओर से काम होने से सड़क बहाल करने में कामयाबी मिली।