युवा उद्यमी रविंद्र पराशर ने युवान अभियान के तहत नौणी विवि के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से जैविक अगरबत्ती विकसित की है। मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत समर्थित इस आइडिया का उद्देश्य पूजा स्थलों पर चढ़ाए फूलों के निपटान की समस्या का एक समाधान देना है। इसके अलावा, धार्मिक स्थलों और समारोह में इस्तेमाल होने वाले फूलों को भी अगरबत्ती में बदलकर एक नया रूप दिया जा रहा है। इससे फूल भी व्यर्थ नहीं होते।
यह होगी अगरबत्ती की खासियत
जैविक अगरबत्ती तैयार करने की प्रक्रिया में आवश्यक तेलों का उपयोग किया जाता है। कोई चारकोल या अन्य सिंथेटिक रसायन नहीं डाले जा रहे हैं। अगरबत्ती बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल है, क्योंकि इस प्रक्रिया से कोई अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता है। यहां तक कि फूलों के अप्रयुक्त भागों का उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने गुलाब, चंदन और लैवेंडर सहित पांच तरह की अगरबत्ती का विकास किया है।