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मंदिर में चढ़ाए फूलों से इस युवक ने बनाई जैविक अगरबत्ती, पढ़ें पूरा मामला

Sat, 27 Apr 2019 08:47 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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- फोटो : अमर उजाला
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ऊना जिले के युवा उद्यमी ने हिमाचल के मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूलों से जैविक अगरबत्ती तैयार की है। यह जून माह तक मार्केट में उपलब्ध हो जाएगी। शनिवार को नौणी विवि के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा ने रोज फेस्टिवल के दौरान इस अगरबत्ती को दिखाया।

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बिट्स पिलानी से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले ऊना जिले के तहसील घनारी, गांव फतेहपुर निवासी युवा उद्यमी रविंद्र पराशर ने एमबीए के अंतिम सेमेस्टर के दौरान युवान वेंडर्स के नाम से कंपनी पंजीकृत की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री स्टार्ट अप योजना में आवेदन किया।

अनुमोदन पर नौणी विवि के फ्लोरिकल्चर और लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग उन्हें इनक्यूबेटर के रूप में आवंटित किया गया। विश्वविद्यालय में उन्होंने अपने मेंटर डॉ. भारती कश्यप, डॉ. वाईसी गुप्ता और डॉ. मनोज वैद्य के वैज्ञानिक इनपुट और सलाह से इस अगरबत्ती का विकास किया गया।
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उत्पाद का परीक्षण विश्वविद्यालय के फ्लोरल क्राफ्ट लैब में किया गया। नौणी विवि के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा ने रविंद्र और विवि के वैज्ञानिकों को बधाई दी है। कहा कि युवा उद्यमियों को नवीनतम विचारों के साथ आगे आते देखना बहुत ही सराहनीय है। 

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मंदिरों में चढ़ाए फूलों के निपटान की समस्या का समाधान होगा

युवा उद्यमी रविंद्र पराशर ने युवान अभियान के तहत नौणी विवि के वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन में मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों से जैविक अगरबत्ती विकसित की है। मुख्यमंत्री स्टार्टअप योजना के तहत समर्थित इस आइडिया का उद्देश्य पूजा स्थलों पर चढ़ाए फूलों के निपटान की समस्या का एक समाधान देना है। इसके अलावा, धार्मिक स्थलों और समारोह में इस्तेमाल होने वाले फूलों को भी अगरबत्ती में बदलकर एक नया रूप दिया जा रहा है। इससे फूल भी व्यर्थ नहीं होते। 

यह होगी अगरबत्ती की खासियत
जैविक अगरबत्ती तैयार करने की प्रक्रिया में आवश्यक तेलों का उपयोग किया जाता है। कोई चारकोल या अन्य सिंथेटिक रसायन नहीं डाले जा रहे हैं। अगरबत्ती बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह कार्बन न्यूट्रल है, क्योंकि इस प्रक्रिया से कोई अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता है। यहां तक कि फूलों के अप्रयुक्त भागों का उपयोग कंपोस्ट खाद बनाने के लिए किया जा रहा है। कंपनी ने गुलाब, चंदन और लैवेंडर सहित पांच तरह की अगरबत्ती का विकास किया है। 
 
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