हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मुश्किल में फंस गए हैं। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में कहा है कि वीरभद्र के खिलाफ प्रथम दृष्टया मनी लांड्रिंग का मामला बनता है। फिलहाल सीबीआई ही बता सकती है कि जांच कहां तक पहुंची है।
अदालत ने आयकर विभाग को एक सप्ताह में मुख्यमंत्री के कर आकलन का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश जी. रोहिणी व न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने बुधवार को सुनवाई के बाद कहा कि वे सीबीआई की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 20 अगस्त को मामले की सुनवाई करेंगे।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने खंडपीठ को बताया कि उपलब्ध रिकॉर्ड व साक्ष्यों के अनुसार वीरभद्र के खिलाफ मनी लांड्रिंग का मामला बनता है। वहीं, गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज के वकील प्रशांत भूषण के तर्कों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे समक्ष जो दस्तावेज पेश किए गए हैं, उन्हीं के आधार पर वह यह कह रहे हैं।
मुख्यमंत्री पर मुकद्दमा चलाने के पर्याप्त सबूत
विस्तृत जानकारी सीबीआई ही दे सकती है। कॉमन कॉज का आरोप है कि मुख्यमंत्री पर मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री होने के बाद भी जांच एजेंसी प्राथमिकी दर्ज करने में अनावश्यक देरी कर रही है।
सीबीआई ने हाल ही में हाईकोर्ट से कहा था कि वह वीरभद्र के खिलाफ वर्ष 2002 में उनके हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहने के दौरान लगे भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के आरोपों की जांच कर सकती है बशर्ते अदालत आवश्यक आदेश जारी करे।
सीबीआई ने पेश जवाब में कहा था कि वेंचर एनर्जी एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को 14 जून 2002 को साई कोटि पनबिजली परियोजना का काम देने में लगे आरोपों की जांच के लिए उसे सक्षम हाईकोर्ट का आदेश जरूरी है।
अदालत ने सीबीआई को वीरभद्र सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के आरोपों की प्राथमिक दर्ज कर जांच जल्द पूरा करने का निर्देश दिया था।
क्या है मामला
खंडपीठ प्रशांत भूषण की याचिका पर सुनवाई कर रही है। इससे पूर्व याची ने वीरभद्र सिंह पर केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्होंने खंडपीठ के समक्ष नया आवेदन दायर करके आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के नए तथ्य सामने आए हैं।
हाइडल पावर प्रोजेक्ट का ठेका 14 जून 2002 को मैसर्स वेंचर एनर्जी टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को दिया गया था। कंपनी इसे पूरा करने में असफल रही और उसे कई बार समय प्रदान किया गया। वीरभद्र ने मुख्यमंत्री बनते ही इस कंपनी को काम करने के लिए 10 माह का समय और प्रदान कर दिया।
वीरभद्र ने 17 अक्तूबर 2012 को चुनाव में शपथपत्र में नहीं बताया कि उन्होंने व उनकी पत्नी ने उक्त कंपनी से ऋण लिया है। उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह ने लोकसभा उपचुनाव में 30 मई 2013 को बताया कि कंपनी से दोनों ने कुल 3 करोड़ 90 लाख रुपये का ऋण लिया है।
इसी प्रकार उक्त कंपनी के निदेशक चंद्रशेखर ने पांच करोड़ रुपये का ऋण मुख्यमंत्री के बेटे विक्रमादित्य व बेटी अपार्जिता कुमारी की कंपनी को दिया। कंपनी के ऑडिट से पता चला कि यह ऋण बिना ब्याज के दिया गया और ऋण वापस कब किया जाएगा इसकी अवधि भी निर्धारित नहीं की गई।
प्रशांत भूषण ने कहा कई मामलों में संलिप्त वीरभद्र सिंह
भूषण का आरोप है कि वीरभद्र मनी लांड्रिंग, भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति व आपराधिक दुराचार के कई मामलों में शामिल हैं, जिसकी गहन व निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
हिमाचल के प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों के बारे में कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई और आयकर विभाग से एक सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट देने को कहा है। प्रशांत भूषण की तरफ से दायर यह केस झूठा और काल्पनिक है।