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‘गुड़िया अनसुनी चीख’ ने उठाए नाबालिग छात्रा को इंसाफ दिलाने पर सवाल

Sat, 07 Jul 2018 11:31 AM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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कहते हैं पहाड़ों की एक बुरी आदत है, यहां आवाज टकराकर वापस आती है। पहाड़ों की यही विशेषता खास भी है कि यहां कुछ भी अनसुना नहीं रहता। हर ध्वनि की प्रतिध्वनि, हर उत्तर का प्रत्युत्तर पहाड़ देते हैं। अकसर पहाड़ों पर आपने लोगों को अपना नाम लेकर चिल्लाते देखा होगा... तो क्या वजह थी कि उसकी चीख बनकर ही रह गई? क्यों यह किसी को सुनाई नहीं दी...?

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ऐसे कई सवालों को उठाकर लिखी गई है ‘गुड़िया अनसुनी चीख...’ पुस्तक, जो गुड़िया को इंसाफ दिलाने के सीबीआई के दावे पर सवाल खडे़ कर रही है। गुड़िया कांड की बरसी पर काव्यात्मक और सांकेतिक शैली में लिखी इस किताब का रिज मैदान शिमला पर शुक्रवार को लोकार्पण किया गया।

खुद गुड़िया के पिता घने दांदी जंगल के साथ बसे दूरदराज गांव से बस में लंबा सफर तय कर इस अवसर पर शिमला आए। हिमाचल के पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी भी लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल रहे। गत वर्ष छह जुलाई को दसवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा गुड़िया (काल्पनिक नाम) का शव दांदी जंगल में मिला था।

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गुड़िया के पिता के ये सवाल

उसका दुराचार के बाद कत्ल कर दिया गया। पुलिस ने जिनको बलात्कारी और कातिल बताकर सलाखों के पीछे पहुंचाया, वे सब सीबीआई की नजर में निर्दोष हैं। सीबीआई ने साढे़ चार फुट के एक चिरानी नीलू को दुराचारी और हत्यारा बताकर मामला सुलझा लेने का दावा किया। उसने ये सब कैसे किया, इसकी कहानी जनता के गले नहीं उतर रही।

बेशक सीबीआई डीएनए के सौ फीसदी मिलान की बात कर रही हो। गुड़िया को इंसाफ दिलाने के लिए जनांदोलन खड़ा करने वाली तनुजा थापटा ने लेखक अश्वनी शर्मा के सहयोग से ‘गुड़िया अनसुनी चीख...’ पुस्तक लिखकर ऐसे ही कई सवाल इस किताब में खड़े किए हैं।

यही सवाल गुड़िया के पिता के भी हैं। इंसाफ को भगवान भरोसे छोड़ते हुए तनुजा थापटा और अश्वनी शर्मा आखिर में लिखते हैं - तेरा इंसाफ होकर ही रहेगा, तेरी चीख अनसुनी चीख नहीं रहेगी, क्योंकि मैंने खुद पहाड़ों को प्रत्युत्तर की शक्ति दी है।
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गुड़िया की जगह विधायक की बेटी होती तो भी क्या ऐसा होता: पिता

महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास किताब को हवा में लहराते हुए गुड़िया के पिता नम आंखों से मीडिया के सामने चिल्ला रहे थे - मेरी गुड़िया का हत्यारा अकेला चिरानी नहीं हो सकता? इसमें बडे़ लोगों का हाथ है।

वह अगर विधायक की बेटी होती तो क्या उसे भी ऐसा ही इंसाफ मिलता? गुड़िया को इंसाफ नहीं मिलेगा तो दरिंदे किसी की भी बेटी को ऐसे ही शिकार बनाते रहेंगे।
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